धान का सीजन इस समय पूरे पीक पर है। ऐसे समय में रविवार को हुई बारिश और तेज हवा ने किसानों की हालत बिगाड़ कर रख दी। बारिश के साथ तेज हवा से जहां खेतों में धान की खड़ी फसल बिछ गई। वहीं मंडी लाए गए धान की बिक्री भी नहीं हुई। रविवार को अनाज मंडी में धान खरीद बंद रही। कैथल शहर की मंडियों से करीब 3 लाख कट्टों का सिर्फ उठान हुआ।
तीन-चार दिनों से किसान को अपनी फसल बेचने में परेशानी आ रही थी। मुश्किल से मिलर्स विवाद सुलझा था। इसके बाद रविवार को संभावित बारिश के कारण शनिवार को ही किसानों की फसल की नियमित बिक्री नहीं हुई थी। रविवार सुबह ही मौसम बदला हुआ नजर आया। इसके बाद हल्की बूंदाबांदी तो कभी तेज बारिश हुई। दोपहर से लेकर सायं तक मौसम साफ रहा। सायं के समय फिर से हल्की बूंदाबांदी हुई। किसान होशियार सिंह, राजू, बाबू राम, शशि सहित अन्य ने कहा कि इस बारिश से फसल में भारी नुकसान होगा। जो फसल मंडियों में बिना बिके पड़ी है, उसकी नमी बढ़ जाएगी, यदि दो-तीन दिन तक वह नहीं बिकी तो वह पूरी तरह से खराब हो जाएगी। जो फसल खेतों में पक कर खड़ी है, उसे काटने में परेशानी आएगी।
हवा चलने के कारण कई इलाकों में खड़ी हुई फसल जमीन पर बिछ गई है। वहीं बारिश से जो बासमती ग्रुप की फसल इस समय पकाई की स्टेज पर है, उसका दाना दागदार हो जाएगा। जिस कारण खरीदार कम कीमत पर खरीदेंगे। इन सब के कारण किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।
मार्केट कमेटी सचिव सतबीर राविश ने बताया कि रविवार को धान की खरीद नहीं हुई। केवल उठान का काम हुआ। करीब तीन लाख कट्टे उठ गए हैं। बारिश से बचाने के लिए मंडी में पड़ी ढेरियों को ढक दिया गया है। आने वाले दिनों में धान डालने के लिए जगह बन गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा ने कहा कि बारिश से फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। चाहे फसल काट दी गई है या अभी खेतों में खड़ी है। सोमवार को भी बारिश की संभावना है।
खुले आसमान के नीचे किसानों का धान बरसात के पानी में भीगता रहा। किसान मजबूरन प्रकृति के प्रकोप को उसकी 6 महीने की खून पसीने की कमाई पर पानी फिरते हुए टकटकी लगाकर देखने को मजबूर है।
किसान बलजीत सिंह, सावन कुमार, गुरदीप, बलकार, ईश्वर सिंह, सोमदत्त, डिंपल ने बताया कि तीन दिन मंडी में धान लिए हुए बैठे है। लेकिन किसी भी खरीद एजेंसी द्वारा उनकी धान को खरीदा नहीं गया है। जिससे आज उनकी धान बरसात के पानी में पूर्ण रूप से भीग चुकी है और उन्हें काफी नुकसान होने का अंदेशा है। किसानों का कहना है इंटरनेट पर 17 अक्तूबर से बरसात के अनुमान से मंडी में राइस मिलर्स ने धान को खरीदना बंद कर दिया था। किसानों का आरोप है कि यह सब कुछ खरीद एजेंसियों की मिलीभगत से हुआ है। जबकि सरकारी खरीद एजेंसियों की जिम्मेदारी बनती है कि मंडी में पहुंचा धान का एक-एक दाना उसी दिन खरीद किया जाना चाहिए, जिससे किसानों को कोई नुकसान न हो।
बरसात के कारण फसलों की पैदावार पर किस प्रकार विपरीत असर पड़ा है। मार्केट कमेटी सचिव अरविंद कुमार श्योकंद ने बताया कि भाव तो सभी फसलों में गत वर्ष की अपेक्षा अच्छे हैं, मगर आवक कम हुई है।
उन्होंने बताया कि मंडी में गत वर्ष अब तक पीआर धान की आवक 29,000 क्विंटल हुई थी, जबकि इस बार इसकी आवक 26,000 क्विंटल ही हुई है। इस समय मंडी में पीआर धान की खरीद सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा की जा रही है। अब तक 1509 किस्म की आवक 15,000 क्विंटल ही हुई है। गत वर्ष इसकी आवक अब तक 74,000 क्विंटल हो चुकी थी। मार्केट कमेटी सचिव अरविंद कुमार श्योकंद ने बताया की इस बार हुई बरसात ने कपास की फसल को काफी प्रभावित किया जिसके कारण काफी फसल खराब हो गई। संवाद
नगर के असंध रोड़ पर स्थित अनाज मंडी में धान की खरीद कम होने के कारण आढ़तियों व किसानों ने रोष जताया है। आढ़ती जोनी, महीपाल, राजकुमार, मेशा, भीम सिंह ने बताया कि वे बीते दिन धान खरीद को लेकर राज्यमंत्री, जिला उपायुक्त व एसडीएम से मिले थे।
ताकि मंडी में धान खरीद का कार्य सुचारू रूप से चल सके। आढ़तियों ने बताया कि 17 प्रतिशत तक नमी तक ही धान की खरीद की जा रही है। अगर 17 नमी से 1 प्रतिशत भी ज्यादा हो जाए धान की खरीद नहीं होती। जिसे लेकर आढ़तियों व किसानों में भारी रोष है। उधर किसानों ने बताया कि मंडी में धान खरीद का कार्य धीमा होने के कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन मौसम बदल रहा है।
रविवार को सुबह से हो रही हल्की बूंदाबांदी ने भी किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जो धान मंडी में पड़ी है उसकी बहुत कम खरीद हो रही है। इसके अलावा बासमती धान यहां पहले से ही नहीं खरीदी जाती जिससे उन्हें बासमती धान को लेकर कैथल व अन्य शहरों में बेचने के लिए जाना पड़ता है। मार्केट कमेटी सचिव कृष्ण धनखड़ ने बताया कि रविवार को धान खरीद का कार्य बंद था। रविवार को उठान का कार्य होना था। इस कारण से खरीद बंद की गई थी। उन्होंने बताया कि शनिवार तक राजौंद अनाज मंडी में बीस हजार क्विंटल धान की फसल की खरीद की जा चुकी है।
गत दिवस तक जिला की विभिन्न मंडियों में खरीद एजेंसियों द्वारा 4 लाख 37 हजार 35 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा सबसे अधिक 2 लाख 23 हजार 566 मीट्रिक टन धान खरीदी गई है।
धान खरीद को लेकर डीसी प्रदीप दहिया ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला में विभिन्न स्थानों पर संचालित मंडियों में समर्थन मूल्य पर धान की खरीद की जा रही है। किसानों की सुविधा के लिए मंडियों में उचित प्रबंध भी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक 4 लाख 37 हजार 35 मीट्रिक टन धान की खरीद कर ली गई है। इसमें 2 लाख 23 हजार 566 मीट्रिक टन खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा, 1 लाख 9 हजार 265 मीट्रिक टन हैफेड द्वारा, 207 मीट्रिक टन भारतीय खाद्य निगम द्वारा और 1 लाख 3 हजार 997 मीट्रिक टन हरियाणा वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा खरीदी गई है। मंडियों से खरीदी गई धान का उठान भी किया जा रहा है। अभी तक 2 लाख 37 हजार 326 मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका है।
डीसी प्रदीप दहिया ने कहा कि किसान अपनी धान को मंडी में पूरी तरह से सुखाकर लाएं, ताकि मंडी में उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आए। उन्होंने कहा कि किसान अपने नजदीक बने कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से कृषि यंत्रों के माध्यम से धान की कटाई के बाद बचने वाले अवशेषों का प्रबंधन करवाएं, ताकि आय में बढ़ोतरी हो। किसान फसलों में आग न लगाएं।