कैथल। फसल बीमा दावा खारिज करना कंपनी को महंगा पड़ गया। उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 29,120 रुपये की बीमा दावा राशि लौटाने के आदेश दिए हैं।
कंपनी की ओर से 5,000 रुपये मुआवजा और 5,000 रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा। कुल कंपनी को 39,120 रुपये 45 दिन के भीतर अदा करने होंगे। यदि 45 दिन में भुगतान नहीं किया गया तो पूरी राशि पर आदेश की तिथि से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
किसान श्रवण ने उपभोक्ता आयोग में दायर शिकायत में बताया कि उन्होंने एचडीएफसी बैंक से कृषि ऋण लिया था और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत रबी 2019-20 की गेहूं की फसल का बीमा कराया था। इसके लिए 6 दिसंबर 2019 को उनके खाते से 3,609.90 रुपये प्रीमियम काटा गया।
अप्रैल 2020 में भारी बारिश और जलभराव से उनकी फसल को 25-30 प्रतिशत नुकसान हुआ जिसकी सूचना कृषि विभाग को दी गई और निरीक्षण भी कराया गया। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने दावा अस्वीकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि फसल का बीमित गांव और दावा किए गए गांव में अंतर होने के कारण किसान स्थानीयकृत क्लेम का पात्र नहीं है। आयोग ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद पाया कि किसान की भूमि गांव सीवन में ही स्थित थी और बीमा कंपनी ने तथ्यों का सही सत्यापन किए बिना दावा खारिज किया।
आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए किसान का दावा स्वीकार करने का आदेश दिया। एचडीएफसी बैंक और कृषि विभाग के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी गई।