भारत बंद हिंसा में छह हजार पर केस दर्ज, एक भी नामजद नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। दलित संगठनों के सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान शहर में हिंसा के मामले में पुलिस ने देर रात लगभग 3000 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। साथ ही रेलवे पुलिस ने अलग से रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने व रेलवे एक्ट के तहत 3000 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। मंगलवार को खुलासा हुआ कि उपद्रवी करनाल रोड बाईपास नाका से नाका प्रभारी की कारबाइन व 15 कारतूस भी छीन कर ले गए। वहीं 3 दुकानों की शिकायत पर तोड़फोड़ के आरोप में अलग से केस दर्ज किए गए हैं तो लगभग 50 मोटरसाइकिलों के मालिक भी अपनी शिकायत लेकर थाना सिविल लाइन पहुंचे।
भारत बंद के आह्वान के बीच उग्र हुई युवकों की भीड़ ने रेलवे के ईंजन को नुकसान पहुंचाने के बाद जमकर उत्पात मचाया था। पुलिस व युवकों के बीच जमकर पत्थर चले। इसमें 50 से अधिक पुलिस कर्मचारी घायल हो गए थे। साथ ही 50 से अधिक बाइक तहस-नहस कर दी गई। 10 से ज्यादा गाड़ियों को तोड़ दिया गया था। पुलिस के वज्र वाहन के अलावा मंगलवार को खुलासा हुआ कि पुलिस की 3 जिप्सियां भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।
थाना सिविल लाइन प्रभारी रामचंद्र ने बताया कि पुलिस ने अज्ञात 3000 लोगों के खिलाफ पथराव करने, पुलिस पर हमला करने, तोड़फोड़ सहित अन्य आरोपों के तहत केस दर्ज कर लिया है। इसी केस में पुलिस नाका प्रभारी रमेश कुमार से एक कारबाइन छीनने, 15 राउंड कारतूस छीनने के आरोप में भी केस दर्ज कर लिया है। जिन मोटरसाइकिलों को नुकसान पहुंचा है, उनके मालिकों की शिकायतें मिल रही हैं। इनमें से 12 की शिकायत आई हैं। शेष को भी इसी केस में जोड़ा जाएगा। उधर, रेलवे चौकी प्रभारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि रेलवे पुलिस ने स्टेशन मास्टर रणधीर सिंह की शिकायत पर रेलवे की प्रॉपर्टी में अवैध रुप से एकत्रित होने व रेलवे एक्ट के तहत लगभग 3000 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। 3 दुकानदारों की दुकानों में तोड़फोड़ करने के आरोप में अलग से 3 केस दर्ज किए गए हैं। एसएचओ ने कहा कि तोड़फोड़ में हुए नुकसान के चलते यह मामले अलग से दर्ज किए गए हैं।
ये पुलिस कर्मचारी हुए हैं घायल
डीएसपी रामकुमार, इंस्पेक्टर ताराचंद, इंस्पेक्टर रामकिशन, एसआई जितेंद्र ढिल्लों, एएसआई राजकुमार, ईएएसआई शमशेर सिंह, कांस्टेबल विकास कुमार, कांस्टेबल पवन कुमार, संदीप कुमार, शेखर, नवीन, प्रदीप, सोनू, शमशेर, ललित, वरियाम, संदीप, सुनील शर्मा, अनिल कुमार, कुलबीर, राजकुमार, करनैल सिंह, कुलदीप सिंह, रामलाल, मेजर सिंह, उमेश चंद, ओमबीर, प्रदीप कुमार, टाइगर, सतीश कुमार, संजय, रामलाल, नरेंद्र कुमार, वजीर सिंह, राजेश कुमार, बलजीत सिंह, नरेश कुमार, दीपक कुमार, सुभाष, यशपाल घायल हुए हैं। इनमें से एएसआई राजकुमार, कांस्टेबल संदीप, प्रदीप, अनिल, कुलदीप अस्पताल में दाखिल हैं। इसके अलावा मंगलवार को छात्रा सोनिया, हरसौला बस्ती निवासी अनूप कुमार व कुतुबपुर निवासी अशोक कुमार जिला अस्पताल में दाखिल हैं। उधर, भाजपा नेता धर्मपाल शर्मा ने घायलों का हाल-चाल जाना और सांत्वना दीं।
दूसरी ओर सोमवार को हुए पूरे घटनाक्रम में लगभग 80 से 90 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
पुलिस घटना की जांच कर रही है। पता लगाया जा रहा है कि हिंसा की शुरुआत कहां से और क्यों हुई? पुलिस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
- आस्था मोदी, एसपी
पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई की है। घायलों का इलाज किया जा रहा है। संवेदनशील स्थानों पर अब भी नजर रखी जा रही है।
- सुनीता वर्मा, डीसी
विपक्षी दलों ने करवाया उपद्रव : शर्मा
कैथल। भगवान परशुराम ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष विनोद शर्मा ने कहा कि विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आड़ में भाजपा को बदनाम करने की साजिश रचते हुए उपद्रव करवाया। कांग्रेसी नेताओं की शह पर कैथल में शांति भंग हुई। यहां अपने कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक में शर्मा ने कहा कि कैथल शांतिप्रिय शहर है। इसकी शांति बनी रहनी चाहिए। कांग्रेसी नेता रणदीप सुरजेवाला द्वारा भाजपा पर आरोप लगाए जा रहे हैं। जबकि उन्हें अपनी राजनीति किन्हीं और मुद्दों पर चमकानी चाहिए। ना कि सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाले ऐसे मामलों में। सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, सरकार ने उसके लिए रिव्यू पिटीशन फाइल कर दी है। इसमें सरकार का कोई कुसूर नहीं है। कुछ लोग समाज को बांटने की राजनीति कर रहे हैं।
अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग मंच संघर्ष मोर्चा ने झाड़ा उपद्रव से पल्ला, कहा-मामले की जांच होनी चाहिए
कैथल। अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग मंच संघर्ष मोर्चा ने झाड़ा उपद्रव से पल्ला झाड़ते हुए जारी विज्ञप्ति में कहा कि उपद्रव में बाहरी व शरारती तत्व शामिल थे। मोर्चा के कार्यकर्ताओं व नेताओं ने डीसी को ज्ञापन देने के बाद लोगों को घर जाने की अपील की थी। इसके बाद पता चला कि कुछ लोग हिंसक हो रहे हैं। इन लोगों को भी समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन लोग नहीं मानें। इस कारण पूरा अंदेशा है कि ये बाहरी तत्व थे। मोर्चा का उनसे कोई लेना-देना नहीं है। मोर्चा इस घटना की निंदा करता है। इसके लिए मोर्चा की बैठक फूल सिंह के आवास पर हुई। इसकी अध्यक्षता फूल सिंह ने की। मोर्चा यह भी स्पष्ट करता है कि पुलिस स्थिति को नियंत्रण करने में असफल रही। कुछ राजनीतिक दलों ने बंद की आड़ में अपनी रोटियां सेकीं। मोर्चा मांग करता है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। बैठक में ईश्वर सिंह गुहणा, रामचंद्र रंगा, महेंद्र पाल धानिया, जगदीश मेहरा, नफे सिंह, राजेश सिंहमार, सुनील बीरवाल, चंद्रमोहन, रमेश गिल, डा. रमेश कुतुबपुर व राकेश बिड़लान मौजूद थे।