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Kaithal News: 11 नशा मुक्ति केंद्रों के काउंसलरों की होगी ट्रेनिंग

Wed, 11 Feb 2026 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। एडीसी डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि नशा एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जिसे केवल आदेशों से नहीं, बल्कि आपसी तालमेल और जन-भागीदारी से ही समाप्त किया जा सकता है। इसके लिए जागरूकता और निगरानी का दोहरा मॉडल अपनाना आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि स्कूलों, कॉलेजों, खेल स्टेडियमों और व्यायामशालाओं में अधिक से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि नशा मुक्ति अभियान को और प्रभावी बनाया जा सके।

ये निर्देश एडीसी डॉ. सुशील कुमार ने मंगलवार को लघु सचिवालय के सभागार में आयोजित नारको-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनकॉर्ड) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। उन्होंने कहा कि जिले के पुराने और खंडहर हो चुके सरकारी भवनों पर विशेष नजर रखी जाए, क्योंकि ऐसे स्थान अक्सर नशेड़ियों के ठिकाने बन जाते हैं।
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एडीसी ने खेल विभाग के अधिकारियों को प्रत्येक खेल केंद्र पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए। साथ ही खेल परिसरों और खिलाड़ियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने को कहा, ताकि खेल के मैदान नशे से पूरी तरह सुरक्षित रह सकें।

उन्होंने ड्रग कंट्रोल ऑफिसर को अधिक से अधिक छापेमारी करने के आदेश दिए गए। उन्होंने ग्राम स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया, ताकि नशे से जुड़ी हर छोटी-बड़ी सूचना तुरंत प्रशासन तक पहुंच सके।

बैठक में सीईओ जिला परिषद सुरेश राविश, गुहला एसडीएम कैप्टन प्रमेश सिंह, डीएसपी ललित यादव, डीएसपी कुलदीप बैनीवाल तथा सीएमओ डॉ. रेणु चावला सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

लक्ष्य ः युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना

एडीसी ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि जिले में संचालित 11 नशा मुक्ति केंद्रों के काउंसलरों की विशेष ट्रेनिंग करवाई जाए। उन्होंने कहा कि उद्देश्य केवल नशा छुड़वाना नहीं, बल्कि प्रभावी काउंसलिंग के माध्यम से युवाओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी है। नशे की लत युवाओं को चोरी और अन्य अपराधों की ओर धकेल देती है, जिसे समय रहते रोकना जरूरी है।
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एडीसी ने आमजन से अपील की कि यदि कहीं नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री या सेवन की जानकारी मिले, तो उसकी सूचना तुरंत जिला प्रशासन या पुलिस को दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। डीएसपी कुलदीप बैनीवाल ने बताया कि नशे के खिलाफ अब तक जिले में 322 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। वहीं ड्रग कंट्रोलर ने जानकारी दी कि मेडिकल स्टोरों और अन्य संदिग्ध स्थानों पर 47 औचक निरीक्षण किए गए हैं। सिविल सर्जन डॉ. रेणु चावला ने बताया कि उन्होंने जिले के पांच नशा मुक्ति केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जांच की और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
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