देश में कोरोना महामारी से सावधान रहने की आवश्यकता हैं। कोरोना संक्रमण के कारण सदियों से चली आ रही दाह संस्कार की परंपरा भी इन दिनों बदल गई है। कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत के बाद उन्हें अंतिम विदाई भी सही तरीके से नहीं दी जा पा रही है। कई परिजन तो मृतकों को अंतिम समय में देख भी नहीं पाते। ऐसे में अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए जागरूकता के साथ इस महामारी का मुकाबला करने की जरूरत है।
पहले मृतक के अंतिम संस्कार के तीसरे दिन अस्थियां उठवाई जाती थीं। अब कोरोना मरीज की मौत के अगले दिन ही अस्थियां उठाई जा रही हैं। पहले मंगलवार व शनिवार के दिन इस तरह के कर्म को अशुभ माना जाता था लेकिन कोरोना से हुई व्यक्ति की मौत में ऐसा नहीं किया जा रहा। कोरोना संक्रमितों की मौत के बाद अंतिम संस्कार भी कोविड-19 प्रोटोकॉल के हिसाब से किया जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य विभाग, नप व पुलिस कर्मचारी शामिल है। जो कि शवों को श्मशान घाट तक पहुंचा कर अंतिम संस्कार करते हैं।
पुराने अस्पताल के पास स्थित श्मशान घाट में शवों का अंतिम करवा रहे पंडित शिवम शर्मा ने बताया कि कोरोना से हुई व्यक्ति की मौत के बाद शवों का अंतिम संस्कार कोविड-19 प्रोटोकॉल में किया जाता है। यहां अगले दिन ही परिजन अस्थियां ले जाते है। प्रशासन के आदेशों के अनुसार यहां ज्यादा भीड़ एकत्रित नहीं होने दी जा रही है। उन्होंने बताया कि केवल अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाली सामग्री को शव के पास ही रखा जाता है।
आधी से ज्यादा चीजों का अब नहीं हो रहा अंतिम संस्कार में उपयोग
जानकारी के अनुसार अब शवों के अंतिम संस्कार में जहां गंगाजल की अहम भूमिका रहती थी। लेकिन अब स्थिति ऐसी है कि शवों के संस्कार के दौरान कर्मचारी पीपीई किट व इसके बाद खुद को सैनिटाइज होते है। सदियों से चली आ रही एक परंपरा के अनुसार गंगाजल के छिडक़ाव से जहां वातावरण में शुद्धि मानी जाती थी। लेकिन अब स्थिति विपरीत है।
कोरोना डैथ नोडल अधिकारी डॉ. अमन सूद ने बताया कि कोरोना से हुई व्यक्तियों की मौत के बाद कोविड-19 प्रोटोकॉल में शव का अंतिम संस्कार करवाया जाता है। टीम में नप कर्मचारी, स्वास्थ्य कर्मी व पुलिसकर्मी शामिल है।
सामान्य व्यक्ति की मौत में उपयोग सामग्री कोरोना से मौत में उपयोग
आटा जौ-500 ग्राम चंदन की लकड़ी-5
काले तिल-50 कपूर-250 ग्राम
चंदन की लकड़ी-5 हवन सामग्री-2 किलो
कपूर-250 ग्राम देसी घी- 2 किलो
हवन सामग्री-2 किलो सफेद कपड़ा- 9 मीटर
देसी घी-2 किलो देसी खांड-2 किलो
शहद की शीशी-1 शॉल
धूप की डिब्बी-1 कपड़ा-7 मीटर
सफेद कपड़ा-9 मीटर पंच रतन-1
बांस बाई माचिस-1
सुतली-200 ग्राम
पराली-4
मौली के गोले-2
गंगाजल की - शीशी
देसी खांड-2 किलो
दही-100 ग्राम
नारियल खोपा-
शॉल-
महिला के लिए लाल कपड़ा
कपड़ा- मीटर
पंच रतन-1
माचिस-1
गाय का गोबर