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Kaithal News: उपभोक्ता आयोग ने 2.81 लाख रुपये का मेडिकल क्लेम किया मंजूर

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कैथल। जिला उपभोक्ता आयोग ने स्वास्थ्य बीमा से जुड़े एक मामले में बीमा कंपनी को 2.81 लाख रुपये का मेडिकल क्लेम देने के आदेश दिए हैं। कंपनी शिकायतकर्ता को पांच हजार रुपये का मुआवजा व पांच हजार रुपये का मुकदमा खर्च भी देगी। आयोग की अध्यक्ष नीलम कश्यप और सदस्य सुनील मोहन त्रिखा और हरिशा मेहता की पीठ ने 45 दिन के भीतर आदेश का पालन करने के निर्देश दिए हैं। भुगतान में देरी होने पर राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। आयोग ने माना कि पॉलिसी पोर्ट होने के बावजूद वेटिंग पीरियड का गलत आधार बनाकर दावा खारिज करना सेवा में कमी है।
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वेटिंग पीरियड का आधार बनाकर खारिज किया था दावा
शिकायतकर्ता अनिल कुमार ने शिकायत में बताया था कि उनके माता-पिता की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी 18 सितंबर 2019 से लगातार जारी थी। शुरुआत में यह पॉलिसी स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी के पास थी, जिसे 18 सितंबर 2023 को दूसरी बीमा कंपनी में पोर्ट कराया गया। दिसंबर 2023 में उनकी माता को सीओपीडी के उपचार के लिए पंचकूला के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज पर 2.81 लाख रुपये से अधिक खर्च हुआ।
आयोग ने माना, 2019 से गिना जाएगा बीमा कवरेज
बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि बीमारी पहले से मौजूद थी और उस पर 48 माह की प्रतीक्षा अवधि लागू होती है। आयोग ने रिकॉर्ड की जांच में पाया कि पॉलिसी वर्ष 2019 से लगातार जारी थी। इसलिए प्रतीक्षा अवधि की गणना भी उसी तिथि से की जानी चाहिए थी, जो सितंबर 2023 में पूरी हो चुकी थी। ऐसे में दिसंबर 2023 में हुए उपचार का खर्च बीमा सुरक्षा के दायरे में आता था। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित उपचार पॉलिसी शुरू होने के लगभग 51 माह बाद कराया गया था। ऐसे में क्लेम अस्वीकार करना अनुचित और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। इसके कारण शिकायतकर्ताओं को मानसिक परेशानी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
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अस्पताल के बिलों के आधार पर मंजूर हुई राशि
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत अस्पताल के बिलों, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद आयोग ने 2,81,016 रुपये की मेडिकल खर्च राशि मंजूर की। साथ ही बीमा कंपनी को यह राशि निर्धारित अवधि में अदा करने के निर्देश दिए। आयोग ने यह भी माना कि बीमाधारक ने तीन वर्ष की अवधि के लिए एकमुश्त 1.26 लाख रुपये से अधिक प्रीमियम जमा कराया था। इसके बावजूद अवधि पूरी होने से पहले पॉलिसी बंद कर दी गई। आयोग ने इसे अनुचित बताते हुए बीमा कंपनी को पॉलिसी को सभी मूल लाभों सहित 17 सितंबर 2026 तक प्रभावी बनाए रखने का आदेश दिया।
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