संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। देश व नगर की खुशहाली के लिए श्री कपिल मुनि मंदिर में पूरे माघ मास चली कथा व हवन यज्ञ का चतुर्दशी तिथि पर पूर्णाहुति के साथ विधिवत समापन हो गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा, जो दोपहर तक चला। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कपिल मुनि के पवित्र तीर्थ में डुबकी लगाकर आराध्य देव की पूजा-अर्चना की। पूर्णाहुति के लिए मंदिर में जन सैलाब उमड़ा।
मंदिर के पुजारी पंडित संजय शास्त्री ने माघ मास पूर्णिमा के महत्व पर विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि माघ शुक्ल चतुर्दशी भगवान शिव व शनिदेव पूजा के लिए अत्यंत फलदायी है, खासकर शनिवार के साथ चतुर्दशी का शुभ संयोग होने से। इस दिन व्रत रखकर शिव अभिषेक व काले तिल/कपड़े दान करने से आर्थिक-मानसिक कष्ट दूर होते हैं। माघ चतुर्दशी शिव को समर्पित है, विशेष पूजा से शुभ फल मिलते हैं।
माघ में तीर्थ स्नान पापों से मुक्ति दिलाता है। इस पौराणिक तीर्थ पर स्नान-पूजन से गंगासागर जैसा पुण्य प्राप्ति होती है। यहां भगवान कपिल ने माता देवहुति को सांख्य शास्त्र का उपदेश दिया था, फिर गंगासागर गए। हवन पूर्णाहुति के बाद मंदिर परिसर में भंडारा आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभोज का आनंद लिया।
शुभ नक्षत्र में माघी स्नान ः पंडित संजय शास्त्री ने बताया कि 1 फरवरी को माघ पूर्णिमा है, शुक्र उदय व शुभ पुष्य नक्षत्र रहेगा। प्रत्येक पूर्णिमा का महत्व है, लेकिन माघी पूर्णिमा विशिष्ट है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस दिन स्नान, ध्यान व दान से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है। जप, हवन व पुण्यकर्म से अनंत फल व नवग्रह दोष शमन होता है। मान्यता है कि माघी पूर्णिमा रात्रि चंद्रमा की अमृतमयी किरणें जल में तत्व संचार करती हैं, जो कष्ट निवारक व आरोग्यदायक है। इसलिए तीर्थ स्नान का विशेष महत्व है।