संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। बरसात न होने के कारण धान की फसल पूरी तरह से सूखने के कगार पर पहुंच गई है। नहर में पानी नहीं है बरसात हो नहीं रही ऐसे में किसान करें तो क्या करें। गौरतलब है कि अभी तक कलायत उपमंडल में शून्य एमएम के बराबर ही बरसात हुई है जिसके कारण से फसल चलने से पूर्व ही जलने लगी है।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के आधार पर कलायत खंड में 25 हजार हैक्टेयर में धान की फसल और चार हजार हैक्टेयर रकबे में कपास की फसल की बुआई हुई है। अभी तक 90 प्रतिशत धान की फसल की रोपाई भी पूरी हो चुकी है।
पानी न मिलने के कारण से रोपाई की गई धान की फसल तो जलने के कगार पर है। सत्यवान, शमशेर व जोगेंद्र का कहना है कि खेतों में बिजली पर्याप्त मात्रा में मिल नहीं पाती और डीजल से पंप चला कर पानी देना बहुत ही महंगा पड़ रहा है। स्मरण रहे कि कलायत उपमंडल के किसान अधिकांश तौर पर नहरी पानी पर ही आश्रित रहते हैं। किसानों का कहना है कि इस बार गर्मी भी बहुत अधिक पड़ी है और यदि वे भूमिगत जल धान की फसल में देते हैं तो उससे भी धान की फसल जलना शुरू हो जाती है।
सिंचाई विभाग का कहना है कि रोटेशन के हिसाब से हर 32 दिनों में नहर में पानी छोड़ा जाता है। इस समय में पहाड़ों पर होने वाली बरसात का पानी बहुतायत मात्रा में मैदानी इलाकों में पहुंच जाता था। जिसे नहरों में छोड़ कर किसानों को बरसाती मोघे दिए जाते थे।
इस बार बरसात की कमी के कारण से पानी की भारी कमी बनी है। विभाग तभी नहरों में पानी छोड़ सकता है जब उसके पास पानी हो। रोटेशन के हिसाब से नहर में पानी 11 अगस्त को आना है। यदि उससे पूर्व बरसात हो जाती है तो तभी नहर में पानी आ सकता है।
पूरे खंड कलायत में धार्मिक स्थलों पर इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए लगातार हवन व भंडारों का आयोजन किया जा रहा है। उसके बाद भी इंद्र प्रसन्न ही नहीं हो रहे। लोगों का कहना है कि इंद्रदेव शायद इस बार कुछ ज्यादा ही रुष्ट हो गए। इससे पूर्व तो इंद्रदेव के नाम से यज्ञ में आहुति डालने के कुछ घंटों के अंदर ही मेघ बरसना शुरू हो जाते थे।