। खरीफ के सीजन में पैक्स और को-ऑपरेटिव सोसाइटी के जरिये यूरिया खाद नहीं मिलने से किसानों की दिक्कत बढ़ रही हैं। जो एजेंसियां खाद की सप्लाई पैक्सो को करती हैं, उनके पास खाद के रैक नहीं आ रहे हैं। हालांकि हैफेड के पास खाद का स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन जानकारी के अभाव व नकद भुगतान के चक्कर में किसान वहां से भी खाद नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में ज्यादा जरूरत होने पर किसान प्राइवेट कंपनियों से यूरिया खाद खरीदकर काम चला रहे हैं।
इस समय 37 पैक्स- जिले में इस समय 37 पैक्स हैं, जहां से किसानों को खाद और डीएपी उपलब्ध होता है। जानकारी के अनुसार कृभको और एफको एजेंसी पैक्सों में खाद की सप्लाई करती हैं, जो बाद में किसानों तक पहुंचता है। इस बार पेक्सों के पास पर्याप्त खाद नहीं पहुंचा है, जिससे किसानों को प्राइवेट कंपनियों का आश्रय लेना पड़ रहा है। इफको एजेंसी के क्षेत्रीय अधिकारी सुरजीत सिंह राठी ने बताया कि उनके पास हर बार सीजन के दौरान खाद के रैक आते हैं, जो खाद से भरी ट्रेनों के रूप में आते हैं। एक अप्रैल से 31 मई तक 54200 कट्टे एजेंसियों ने सोसाइटी को उपलब्ध करवा दिए थे, जो पेक्सों में भेज दिए गए। उसके बाद जून में रैक नहीं आया।
जानकारी के अभाव और पुराना स्टॉक कह हैफेड से खाद नहीं ले रहे किसान- हैफेड का पास खाद का करीब 6000 एमटी का स्टॉक इस समय भी मौजूद है। फिर भी किसान उसे ये सोचकर नहीं खरीद रहे हैं कि स्टॉक पुराना है। कहीं पुराना होने के कारण इसकी क्वालिटी पर फर्क तो नहीं पड़ गया है। अधिकारियों का कहना है कि हैफेड पैक्सों के जरिये भी किसानों को खाद उपलब्ध करवाने के लिए तैयार है, लेकिन उसके लिए एक छोटी सी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। पैक्स के पदाधिकारी इस संबंध में को-ऑपरेटिव सोसायटी के जरिये उन्हें पत्र लिखकर मांग कर सकते हैं कि किस जगह कितने खाद की जरूरत है, जो व तुरंत उपलब्ध करवाने को तैयार है।
जिले में धान के सीजन में करीब 60 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद और 12 हजार एमटी डीएपी की होती है खपत- जिले में इस बार 01 लाख 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान लगने का अनुमान है। इसको देखते हुए कम से कम 60 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद और 12 हजार एमटी डीएपी की लागत संभावित है। अब तक जिले में 1 लाख 10 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई हुई है। पैक्सों में सरकारी एजेंसियों से खाद की पूरी आपूर्ति नहीं होने के कारण किसान प्राइवेट डीलरों से भी खाद खरीद रहे हैं।
पत्र-व्यवहार से पैक्स लें जरूरत अनुसार खाद-हैफेड के डीएम अनूप कुमार नैन ने कहा कि वे लगातार खाद की सप्लाई किसानों को दे रहे हैं। इस समय भी उनके पास स्टॉक मौजूद है। किसान या तो उनके पास से सीधे तौर पर खाद ले सकते हैं। अगर उन्हें पैक्स के जरिये खाद चाहिए तो वे इसके लिए भी सहयोग को तैयार हैं। पैक्सों के पदाधिकारी उन्हें पत्र व्यवहार के जरिये जरूरत के अनुसार खाद ले सकते हैं, जो तुरंत उपलब्ध करवाया जाएगा।
एक माह कम खाद हो तो दूसरे माह बढ़ाया जाता है एजेंसी का सप्लाई टारगेट:- प कृषि निदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि जिले में किसानों को खाद की पूरी सप्लाई दी जा रही है। सरकार की एजेंसियों से खाद न मिलने पर प्राइवेट कंपनियों जैसे चंबल, आईपीएल, उत्तम, किसान और एनएफएल से आपूर्ति दी जा रही है। उन्होंने बताया कि एजेंसियों को सप्लाई के लिए टारगेट दिया जाता है। अगर किसी एजेंसी के पास एक माह में सप्लाई कम हो तो, उसका टारगेट अगली बार बढ़ाया जाता है। किसानों को रेगुलर सप्लाई देने के लिए विभाग पूरी तरह से प्रयासरत है।
कई दिनों से पैक्स में खाद लेने आ रहे किसान -को-ऑपरेटिव बैंक में खाद लेने के संबंध में पहुंचे खुराना पैक्स कमेटी सदस्य गांव कुलतारण निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि किसानों को पिछले कई दिनों से खाद की जरूरत पड़ रही है। अभी तक पैक्स में खाद नहीं आया है। काफी किसान उधार पर खाद खरीदकर बाद में पैसे चुकाते हैं। ऐसा केवल वहीं से संभव है। प्राइवेट में खाद ले ने पर तुरंत भुगतान करना पड़ता है।
असमंजस में पड़े किसान : खाद उपलब्ध करवाने की मांग करते हुए नरड़ पैक्स के सदस्य हीरालाल ने कहा कि पैक्स में किसान खाद लेने के लिए आ रहे हैं, लेकिन मिल नहीं रहा। किसानों के साथ-साथ वे खुद भी असमंजस में हैं कि पैक्स में खाद मिलने का इंतजार करें या प्राइवेट डीलरों से खरीदें। धान की फसल के लिए खाद सबसे जरूरी है।
जरूरत के अनुसार खाद ले रहे किसान: खाद विक्रेता दुकानदार मोहित ने बताया कि वे किसानों को किसान कंपनी का खाद उपलब्ध करवा हरे हैं। उनके पास से सप्लाई पूरी तरह से नियमित दी जा रही है। जिस किसान को जितनी जरूरत है, उसे खाद उपलब्ध करवाया जा रहा है।
प्राइवेट कंपनियों की सप्लाई नियमित
खाद विक्रेता मदन लाल ने बताया कि किसान उनके पास लगातार खाद के लिए आ रहे हैं और वे जरूरत अनुसा उन्हें खाद दे रहे हैं। आईपीएल और उत्तम का खाद किसानों को दिया जा रहा है। फिलहाल किसान उनके पास से खाद लेकर सही काम चला रहे हैं। उनके पास सप्लाई नियमित है।
जगदीशपुरा के प्रगतिशील किसान शैंकी का कहना है कि पैक्स पर खाद नहीं मिल रही। धान के लिए खाद की तुरंत आवश्यकता है। लेकिन किसान क्या करें। सरकार को चाहिए कि शीघ्र पैक्स में खाद भेजी जाए।