कैथल। धान के सीजन खत्म होने की कगार पर है। ऐसे में धान की सरकारी खरीद खत्म हुए भी 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन एग्रीमेंट के निर्धारित समय का एक महीना बीतने के बावजूद सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में जिले के राइस मिलरों में रोष है। उनका कहना है कि एग्रीमेंट के निर्धारित समय से एक महीना बीत चुका है लेकिन अभी तक प्रदेश सरकार ने एफसीआई को पत्र नहीं लिखा है।
गौरतलब है कि पूरे प्रदेश में 1300 और कैथल जिले में 150 से अधिक राइस मिलर सीएमआर का कार्य करते हैं। इस बार सरकार ने एक नवंबर से 15 मार्च तक मिलिंग का कार्य करने के लिए समय तय किया है परंतु अभी तक प्रदेश सरकार ने एफसीआई को पत्र नहीं लिखा है। ऐसे में एक माह बीतने के बावजूद सीएमआर का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। कैथल के राइस मिलरों ने दो दिन पहले ही सांसद नवीन जिंदल को ज्ञापन भी दिया था। यदि जल्द ही सीएमआर का काम शुरू नहीं हुआ तो मिलरों को बोनस नहीं मिल पाएगा क्योंकि सरकार के निर्देशों के तहत मिलरों को 31 मार्च तक सीएमआर का काम पूरा करने के बाद ही बोनस मिल पाता है।
पिछले साल भी देरी से सीएमआर का कार्य हुआ था शुरू
कैथल राइस मिलर एसोसिएशन के प्रधान तरसेम गोयल ने बताया कि सरकार ने पिछले साल भी देरी से सीएमआर का कार्य शुरू करवाया था। ऐसे में कई राइस मिलरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। क्योंकि यदि सरकार को उसके तय समय के अनुसार चावल की डिलीवरी नहीं दी जाती तो सरकार मिलरों को बोनस नहीं देती है। ऐसे में उन्हें देरी से काम शुरू होने पर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। प्रधान ने कहा कि एक राइस मिलर का एक माह में पांच से सात लाख रुपये का खर्च मिल चलाने पर होता है। यदि मिल चलने के बावजूद चावल निकालने का काम नहीं हुआ तो इसका खामियाजा सीधा राइस मिलरों को उठाना पड़ता है।
इस बार सीएमआर के काम में डेढ़ महीने की हो गई है देरी
कैथल राइस मिलर एसोसिएशन के सचिव सागर ने बताया कि इस बार सरकार की ओर से एफसीआई को अभी तक चावल की डिलीवरी को लेकर पत्र न लिखे जाने की स्थिति में सीएमआर के काम में डेढ़ महीने की देरी हो गई है। सीएमआर का जो काम नवंबर के शुरू होते ही हो जाना चाहिए था, वह दिसंबर शुरू होने के बावजूद नहीं हो पाया है। सीएमआर का काम के शुरू होने में लगातार देरी के कारण राइस मिलरों को परेशानी हो रही है।
कैथल का कहा जाता है धान का कटोरा-
गौरतलब है कि बढ़िया किस्म के बासमती चावल के उत्पादन के लिए कैथल को धान का कटोरा कहा जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि जिला अच्छे किस्म के बढ़िया बासमती के लिए देश और विदेशों में जाना जाता है। यहां के किसानों ने बासमती की खेती में पिछले लंबे समय में काफी सुधार किया है। इस कारण यहां का चावल पूरे विश्व में जाता है।
वर्जन
सीएमआर के कार्य को लेकर सरकार के आदेशों के तहत जिले के सभी राइस मिलों में फिजिकल वेरिफिकेशन का काम किया जा रहा है। इस फिजिकल वेरिफिकेशन का काम पूरा होते ही सीएमआर का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। इसके लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। - निशांत राठी, डीएफएससी, कैथल।