संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। पिछले कुछ दिनों से मौसम के बदले मिजाज ने आम जनजीवन के साथ-साथ खेती-किसानी की चिंता बढ़ा रखी है। मंगलवार को दिनभर आसमान में बादलों का डेरा बना रहा, जिससे धूप की तपिश तो कम हुई, लेकिन किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गईं।
मौसम विभाग ने आगामी दिनों में बारिश की संभावना जताई है। उधर, खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ी फसलों पर संकट देख किसान परेशान नजर आ रहे हैं। मौसम में आए इस बदलाव का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दिया है।
अधिकतम तापमान जहां 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, वहीं न्यूनतम तापमान बीते तीन दिनों में करीब 4 डिग्री गिरकर 17 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। ठंडी हवाओं और गिरते तापमान के कारण वातावरण में हल्की सिहरन महसूस की जा रही है। करीब 11 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही हवाओं ने मौसम को और ठंडा बना दिया है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. रमेश चंद्र के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते अगले 24 से 48 घंटों के दौरान हल्की से मध्यम बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है। ऐसे में मौसम का यह रुख किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
खेतों में रबी की फसलें, विशेषकर गेहूं और सरसों, पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी हैं। कई क्षेत्रों में कटाई का कार्य तेजी से चल रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर फसल काटकर खेतों में सुखाने के लिए रखी गई है। यदि हल्की बारिश भी होती है तो फसल का नुकसान होना तय है। यदि तेज हवाएं चलती हैं, तो खड़ी फसल के गिरने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे दाने की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि पकी हुई फसल को जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं या तिरपाल आदि की व्यवस्था रखें, ताकि बारिश से बचाव किया जा सके। साथ ही फिलहाल खेतों में सिंचाई न करने की भी सलाह दी गई है, क्योंकि गीली मिट्टी में तेज हवाओं के कारण फसल के गिरने की आशंका बढ़ जाती है।