संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। बिना रेडियोलॉजिस्ट के जिला नागरिक अस्पताल अस्पताल चल रहा है। यही हाल चीका का भी है। दोनों जगहों पर अल्ट्रासाउंड मशीन लगी है पर रेडियोलॉजिस्ट न होने से मरीजों को परेशानी हो रही है क्योंकि उनका काम नहीं होता।
जिला नागरिक अस्पताल के यह हाल करीब डेढ़ साल से है। रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण मरीजों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत करीब तीन साल पहले ही जिला नागरिक अस्पताल सहित गुहला के सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन पहुंची थी।
छह महीने बाद ही रेडियोलॉजिस्ट ने नियुक्ति ली थी। इसके बाद वह छह दिन में दो दिन चीका और चार दिन सामान्य अस्पताल कैथल में अल्ट्रासाउंड करने के लिए जाती थीं, लेकिन काम का दबाव अधिक होने पर उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से ही अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सेवा पूरी तरह से बंद हो गई।
नतीजा, अब दोनों जगहों से मशीनें बंद पड़ी हैं। रोडियोलॉजिस्ट की कमी से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता है। ऐसे में मरीजों को निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों में जेब ढीली करनी पड़ रही है।
जिला नागरिक अस्पताल में गर्भवती महिलाओं सहित अन्य करीब 70 से 80 मरीज रोजाना अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों में जाना पड़ता है। साथ ही ज्यादा रुपया खर्च करना पड़ रहा है।
परेशानी लोगों की जुबानी
विवेक नगर निवासी सूरज कुमार ने बताया कि उसे पथरी की बीमारी है। वह दर्द से परेशान हैं। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आए पर पता चला कि यहां अल्ट्रासाउंड नहीं होता। अब बाहर 700 रुपये खर्च करने पड़े। जिला प्रशासन को मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड का प्रबंध जरूर करना चाहिए। वहीं, महिला रीना देवी ने बताया कि वह गर्भवती हैं और चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा है। अस्पताल में इसकी सुविधा नहीं है। उसे निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र में भेजा गया है।
रेडियोलॉजिस्ट नियुक्त करने के सिविल सर्जन कार्यालय की तरफ से कई बार निदेशालय में अधिकारियों से पत्राचार किया गया है। हाल में इसका विज्ञापन भी निकाला गया है। अब उम्मीद है कि जल्द ही यहां पर रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति होगी। -डॉ. सचिन मांडले, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल