पुराने बस स्टैंड की जमीन पर निर्माणाधीन सिटी स्क्वायर
कैथल। पुराने बस स्टैंड की जमीन पर निर्माणाधीन सिटी स्क्वायर का काम आगे नहीं बढ़ रहा। नगर परिषद के अफसरों की इसे लेकर खासी किरकरी हो रही है। इस अधूरी परियोजना को सिरे चढ़ाने के लिए तीन बार टेंडर फेल हो चुका है। किसी भी निर्माण एजेंसी ने इस काम में रुचि नहीं दिखाई। अब अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं।
मार्गदर्शन के लिए फाइल चंडीगढ़ मुख्यालय भेजने को लेकर कागज तैयार किए जा रहे हैं। मार्गदर्शन मांगा जा रहा है कि टेंडर नहीं हो रहा तो आगे क्या किया जाए। 19.78 करोड़ रुपये की लागत से बचे हुए काम को पूरा किया जाना है। काम रिस्क एंड कॉस्ट के आधार पर होना है, इसलिए कोई भी नई एजेंसी पुराने ठेकेदार द्वारा छोड़े गए काम का जोखिम नहीं उठाना चाहती। एजेंसियों को डर है कि अधूरे निर्माण में तकनीकी खामियां हो सकती हैं, जिसका खामियाजा भविष्य में उन्हें भुगतना पड़ सकता है।
धन की बर्बादी का प्रतीक बन रहा भवन : यह प्रोजेक्ट करीब एक साल से ठप पड़ा है। पुराने बस स्टैंड की लगभग साढ़े पांच एकड़ जमीन पर खड़ा आधा-अधूरा भवन अब देख-रेख के अभाव में जर्जर होने लगा है। दीवारों में दरारें और सड़ता हुआ सरिया प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। यदि जल्द ही काम शुरू नहीं हुआ, तो अब तक खर्च किए गए करोड़ों रुपये मिट्टी में मिल सकते हैं। यह ढांचा न केवल सरकारी धन की बर्बादी का प्रतीक बन गया है, बल्कि शहर के बीचों-बीच एक खंडहर जैसा नजर आने लगा है।
कैथल का यह सबसे बड़ा प्रोजेक्ट अक्तूबर 2018 में शुरू हुआ था, जिसकी कुल लागत करीब 54 करोड़ रुपये आंकी गई थी। भ्रष्टाचार के आरोपों और एजेंसी की लापरवाही के कारण यह प्रोजेक्ट साल 2021 से अधर में लटका हुआ है। बीच में काम शुरू हुआ लेकिन पूरा नहीं हो सका।