Children are being called in only a few Anganwadi centers
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कोरोना महामारी के दृष्टिगत अभी आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमित रूप से बच्चों अथवा गर्भवती महिलाओं को बुलाना शुरू नहीं किया गया है। ऐसे में विभाग केवल जरूरी कार्यों के दौरान ही बच्चों अथवा महिलाओं को केंद्रों में बुला रहा है। टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच पड़ताल, विशेष बैठकों या फिर पोषण व अन्य कार्यक्रमों के दौरान ही बच्चे व महिलाएं केंद्रों में पहुंच रहे हैं। इसके अलावा कुछ ही बच्चों को ही केंद्रों में बुलाया जा रहा है ताकि प्ले स्कूलों के लिए अभ्यास कक्षाएं लगाई जा सकें।
ग्रामीण और शहरी हर क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों में वहीं की रहने वाली वर्करों व हेल्परों को नियुक्त किया गया। वर्करों का कहना है कि केंद्रों में जो भी सामान बच्चों या गर्भवतियों के लिए आता है, उसके लिए पहले तो केंद्र से राशन बांटा जाता है। अब किसी कारणवश महिला या बच्चे केंद्र में नहीं पहुंच पाते हैं तो उन्हें घर-घर जाकर राशन उपलब्ध करवाया जाता है।
नए पंजीकरण की बात करें तो गांव अथवा शहरी क्षेत्र में बच्चे के जन्म के साथ ही आंगनबाड़ी वर्कर उसके पंजीकरण से संबंधित कार्य को शुरू कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जो बच्चे बाहर से आने के बाद किसी केंद्र में जाना शुरू करते हैं तो उनके पंजीकरण से संबंधित कार्य भी उसी समय किया जाता है।
सीडीपीओ कमलेश गर्ग ने बताया कि जिले के 191 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूलों में बदलने का विभाग का प्रयास है। फिलहाल केंद्रों में बहुत जरूरी होने पर ही बच्चों या महिलाओं को बुलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र में बच्चों को बुलाने और प्ले स्कूलों से संबंधित विभाग के निर्देशों का पालन किया जा रहा है।