कलायत। गांव बालू में पुरातात्विक टीले की जमीन को राजस्व विभाग की तरफ से दूसरे लोगों के नाम करने के मामले में सरकार ने संज्ञान लिया है। इस मामले में मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम ने जांच शुरू कर दी है। इसके तहत टीम राजस्व विभाग के रिकार्ड खंगाल रही है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही राजस्व विभाग ने इसका संरक्षण करने की बजाए 13 एकड़ पांच कनाल नौ मरले भूमि दूसरे लोगों के नाम करने का मामला उजागर हुआ था। टीम जमाबंदी के लिए गिरदावरी की रिपोर्ट पूरी करने वाले अधिकारियों की भी जानकारी जुटा रही है। केंद्र सरकार ने 25 नवंबर 2009 को 17/24-87/3466 खसरा नंबर के तहत उक्त भूमि का इंतकाल पुरातत्व विभाग के नाम दर्ज करने की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत छह सितंबर 2018 को भूमि का इंतकाल प्राचीन पुरातात्विक स्थल टीला के नाम दर्ज हुआ।
सरकार की नीति अनुसार टीला भूमि पुरातत्व विभाग के अधीन है। इस मायने से संबंधित भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण व खनन पर प्रतिबंध है। इस बारे में सामाजिक कार्यकर्ता गुरदेव सिंह बालू, महीपाल, विजय कुमार, रोशन लाल, रामस्वरूप ने आरोप लगाते हुए कहा कि इससे यह जाहिर होता है कि भूमि संरक्षण को लेकर अधिकारी सचेत नहीं है।