संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। स्वर्ग द्वार मंदिर में महंत विश्वनाथ गिरी व महंत धीरज पुरी ने एक धार्मिक चर्चा करते हुए कहा कि प्रभु के नाम का जप जीवन को धन्य बना देता है।
उन्होंने कहा कि सांसारिक दुखों से मुक्ति का एकमात्र मार्ग प्रभु स्मरण है और जो भी जीव सच्चे भाव से नाम का जप करता है, उसका जीवन न केवल शांत होता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी पाता है। उन्होंने कहा कि यह साधना किसी विशेष स्थान, वेश या अवस्था की मोहताज नहीं है, केवल दिल की श्रद्धा और भक्ति होनी चाहिए। प्रभु का नाम स्वयं में परम औषधि है जो चित्त को निर्मल करता है।
हमारे भीतर के विकारों का नाश केवल प्रभु नाम स्मरण से ही संभव है। कठिन समय में वही नाम रक्षा करता है जिसे हम सच्चे दिल से पुकारते हैं। महंत ने कहा कि कलियुग में प्रभु नाम जप सबसे सरल, सुलभ और श्रेष्ठ साधना है। यह हृदय से जुड़ी है, दिखावे से नहीं। दीप अंधकार को मिटा देता है, वैसे ही प्रभु नाम अज्ञान और पाप को समाप्त करता है।
जो भी व्यक्ति प्रभु के नाम में रम जाता है, वही सच्चा साधक कहलाता है। उन्होंने कहा कि प्रभु के नाम स्मरण से आत्मा में शांति और संतोष का भाव आता है और जीवन में स्थिरता आती है। भौतिक उपलब्धियां क्षणिक हैं, लेकिन प्रभु स्मरण शाश्वत है।
साधना के पथ पर पहला कदम प्रभु स्मरण है, जो आत्मा को उस अनंत शक्ति से जोड़ता है। जब जीवन थकान से भर जाए, तो यही नाम नई ऊर्जा देता है। महंत ने कहा कि प्रभु का नाम जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है, और जो व्यक्ति जीवन भर उसका स्मरण करता है, वह अंत में मोक्ष का अधिकारी बनता है। प्रभु स्मरण को जीवन में उतार लें, वही सच्ची साधना है।
इस मौके पर सुरेंद्र सरदाना, ममता सरदाना, प्रशांत आनंद, गौरव वधवा, पूर्ण सैनी, राम रतन सैनी, राजेंद्र राणा, भीम मेहता, प्रवेश, शिल्पा उपस्थित रहे।