संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में कुत्तों व बंदराें के काटने के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। इस कारण रैबीज होने का खतरा भी बढ़ा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नवंबर महीने में इस साल अब तक के सबसे अधिक यह मामले सामने आए हैं।
बीते महीने में 302 मामले आए हैं। अब जिले में यह स्थिति बन रही है कि प्रतिदिन 15 से 18 नए मरीज आ रहे हैं। ये मरीज कुत्ते या बंदर के काटने के बाद रैबीज की बीमारी से बचाव के लिए टीक लगवाने सामान्य अस्पताल में पहुंच रहे हैं। जबकि अक्तूबर महीने में कुत्तों व बंदराें के काटने के करीब 200 मरीज ही सामने आए थे। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सर्दियों में रैबीज की बीमारी बढ़ने का खतरा अधिक होता है।
यह बोले लोग ः अस्पताल में राजौंद में अपने बेटे को टीका लगवाने पहुंची ममता रानी ने बताया कि एक दिन पहले ही उसके बेटे अनुज को एक बंदर ने काट लिया था। इसके बाद वह सुबह के समय रैबीज का टीका लगवाने के लिए अस्पताल में पहुंची। कहा कि गांवाें में भी बंदरों के घूमने की समस्या बढ़ गई है। इस कारण बच्चाें में काफी भय होता है। संबंधित विभाग को इस समस्या के समाधान के लिए आगे आना चाहिए।
वहीं, सिरटा रोड निवासी रेखा ने बताया कि उसकी पांच वर्षीय पोती नेहा को गली में एक कुत्ते ने काट लिया था। उसे टीका लगवाने के लिए वह आई थी। कहा कि गलियों में घूम रहे कुत्तों को समय पर टीका लगवाना चाहिए, ताकि उनके काटने से लोगों को कोई खतरा न हो सके।
सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला ने बताया कि रैबीज से बचाव को लेकर लोगों को स्वास्थ्य विभाग को लगातार जागरूक किया जाता है। इस जागरूकता कार्यक्रम के तहत ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को जानकारी दी जा रही है। इसके साथ रैबीज से बचाव के लिए बनाए गए टीका करण केंद्र में भी अलग से कर्मियाें की ड्यूटियां लगाई गई है। लोगों से आह्वान है कि वे बच्चों और बुजुर्गाें का खास ध्यान रखें।
इस साल माह दर माह आए मामले
माह
केस
जनवरी
180
फरवरी
170
मार्च
130
अप्रैल
132
मई
175
जून 190
जुलाई 210
अगस्त 195
सितंबर 198
अक्तूबर 200
नवंबर 302