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Kaithal News: खेती में रसायनों के प्रयोग से बढ़ा कैंसर ः डॉ. रमेश

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गुहणा, जसवंती, बात्ता व खेड़ी शेरू गांव में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर की शुरूआत हुई। इस मौके पर किसानों को प्राकृतिक खेती पर जागरूक किया। केंद्र के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि खेती में रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से समाज को कैंसर जैसी घातक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है तथा आदमी की औसत आयु भी घट गई है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती भविष्य की पूंजी और सेहत की खेती है, जिसे अपनाकर हम अपने परिवार समाज और देश को जहर मुक्त भोजन उपलब्ध करवा सकते हैं। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जसबीर सिंह ने कहा कि रसायन मुक्त खेती आज समय की मांग हैं तथा किसानों के पास खुद की जमीन हैं, इसलिए वो सौभाग्यशाली है कि वो अपना शुद्ध अनाज व सब्जियां पैदा करके खा सकते है।
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उन्होंने आगे कहा कि चारा फसलों पर कीटनाशकों के प्रयोग से कीटनाशक दूध के माध्यम से सीधे ही शरीर में चले जाते हैं जिससे स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ते है। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे सबसे पहले अपने खेत में हर रोज प्रयोग होने वाली सब्जियों तथा चारा फसल को प्राकृतिक खेती प्रणाली से उगाकर इन्हें जहर मुक्त करें तथा अपना व अपने परिवार की खान-पान की आदत में सुधार करें।

मृदा वैज्ञानिक व आयोजक डॉ दीपक कुमार ने किसानों को मिट्टी व पानी जांच करवाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से हम अपने खेत कि मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं। प्राकृतिक खेती में रासायनिक खादों व कीटनाशकों का प्रयोग नहीं होता, बल्कि प्राकृतिक रूप से तैयार किए गए उत्पादों जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र व दशपर्णी अर्क इत्यादि का उपयोग किया जाता हैं।

ये प्राकृतिक उत्पाद मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों कि संख्या बढ़ने में मदद करते हैं और इस पद्धति से पैदा होने वाली फसलें भी स्वास्थ्य के लिए वरदान हैं।
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केंद्र के वैज्ञानिक डॉ अमित कुमार ने किसानों को कहा कि फ सलों की अधिक उपज लेने के लिए खरपतवारों का नियंत्रण करें व फसल में पानी व पोषकतत्वों की कमी न होने दें।
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