संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के डिपो में बसों की संख्या फिर एक बार घट गई है। जर्जर बसों के कारण कुल 202 बसों में से 15 बसें बाहर हो गईं, जिससे अब बसों की संख्या 187 रह गई है। इन 187 बसों में लगभग 87 बसें बीएस-3 और बीएस-4 तकनीक वाली हैं। जर्जर बसों के रूट से बाहर होने के बाद बड़े रूटों पर यात्रियों को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा, वहीं दैनिक यात्रियों को भीड़ में सफर करना पड़ रहा है।
यद्यपि जिले में बस सेवाओं को लेकर दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति अलग है। ग्रामीण इलाकों में बसें केवल एक से डेढ़ घंटे के अंतराल पर आती हैं। इस कारण यात्रियों को बसों में भीड़ और खड़े होकर सफर करने की समस्या रहती है, जिससे दुर्घटना का जोखिम भी बना रहता है।
लोकल रूटों पर सबसे ज्यादा परेशानी है, जहां ग्रामीण और शहर के बीच आवाजाही करने वाले लोग लंबे समय तक बस का इंतजार करते हैं। पूछताछ केंद्र पर भी बसों की जानकारी लेने के लिए यात्रियों की लंबी कतारें लगती हैं।
यात्री विक्रम, कमल, नरेंद्र और विशाल ने बताया कि रोडवेज के पास पहले से ही बसों की कमी थी। यदि नई बसें भेजी जातीं तो थोड़ी राहत मिल सकती थी। उन्होंने कहा कि पूरे वर्ष भर डिपो बसों की कमी से जूझता रहा, जिससे यात्रियों को लगातार परेशानी हुई।
डिपो में हालिया बदलाव
कुछ समय पहले डिपो में 10 नई एसी बसें आई थीं, जिससे व्यवस्था में थोड़ी सुधार हुई थी। लेकिन पिछले साल नवंबर में बीएस-6 तकनीक वाली बसें रोहतक, जींद और भिवानी डिपो में भेज दी गईं, जबकि उनकी जगह जर्जर बसें कैथल डिपो में आ गईं। सरकार के नियमों के अनुसार, 15 जर्जर बसों की जगह इस माह के अंत तक नई बसें डिपो में उपलब्ध कराई जाएंगी।