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पराली जलाने से मित्र कीट नष्ट होते : डॉ. जसबीर

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कैथल। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से गांव मूंदड़ी में जिला स्तरीय फसल अवशेष प्रबंधन चेतना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. रमेश चंद्र वर्मा ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जागरूक किया। कहा कि धान के फानों में आग लगाने से आबो-हवा प्रदूषित होती हैं और वायु गुणवत्ता सूचकांक पर विपरीत प्रभाव पड़ता हैं, जिससे आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, हृदय समस्या आदि होती हैं।
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उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वो फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें। केंद्र के विस्तार शिक्षा वैज्ञानिक डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ जमीनों में उपस्थित मित्र कीट भी नष्ट होते हैं, जो हमारी पैदावार पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। उन्होंने आगे बताया कि जैविक कार्बन भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने का प्रमुख कारक हैं।
भूमि के जैविक कार्बन को चार ही तरीकों से बढ़ाया जा सकता है या तो खेतों में जैविक खादों जैसे गोबर खाद, केंचुआ खाद आदि डाले, या अपने खेत में हरी खाद जैसे ढैंचा, मूंग इत्यादि उगाकर भूमि में मिला दे या फसल अवशेषों का यथास्थान प्रबंधन करके खेत में ही मिला दें और चौथे तरीके में प्राकृतिक खेती प्रणाली अपनाए जिससे भूमि के सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ती हैं।
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केंद्र के सस्य वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार ने बताया कि किसान सरकार की ओर से अनुदान पर दी जाने वाली मशीनों जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर, सरफेस सीडर, जीरो टिलेज मशीन, मल्चर, चॉपर तथा रोटावेटर की ओर से फसल अवशेषों का यथास्थान प्रबंधन कर सकते हैं। उन्होंने इसके अतिरिक्त आगामी रबी फसल गेहूं की सिफारिश उन्नत किस्मों तथा खरपतवार नाशकों की भी जानकारी दी। इस कार्यक्रम में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के बीएससी (होंर्स) कृषि के अंतिम वर्ष के प्रशिक्षु छात्रों ने भी हिस्सा लिया।
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