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आशियाना बनाना हुआ महंगा, सरकार द्वारा वाहनों में लोडिंग के लिए मात्रा तय करने के कारण महंगी हुई निर्माण सामग्री

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आरटीए कार्यालय की कार्यप्रणाली में सरकार द्वारा आमूलचूल परिवर्तन किया गया है। जिसका असर कहीं हुआ या नहीं, भवन निर्माण उद्योग पर जरूर हुआ है। पिछले महीने भर में निर्माण सामग्री की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। जिस कारण इस उद्योग में काम धंधा मंद पड़ने लगा है। रेत, ईंट, बजरी, कोरसेंट यहां तक कि सरिये की कीमतें भी बढ़ी हैं। इसका असर यह सामग्री बेचने वाले दुकानदारों व यहां काम करने वाले मजदूरों पर सीधा नजर आ रहा है।
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यमुना नदी के एरिया से आने वाले रेत को लेकर आरटीए कार्यालय के माध्यम से सरकार ने नियमों की पालना सुनिश्चित की है। साथ ही अंडरलोड वाहनों के चलने की अनुमित है। जिस कारण एक ट्रक या बड़े ट्राले में जितना रेत, बजरी या कोरसेंट एक बार में आता था, अब उसके लिए दो चक्कर लगाने पड़ते हैं। नियमानुसार यह सही भी है कि अंडरलोड वाहन ही चलाने चाहिए। इसी नियम का पालन आरटीए कार्यालय द्वारा करवाया जा रहा है। लेकिन भराई व इस सामग्री की कीमतें व ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ जाने के कारण अब कीमतें नीचे आने की बजाए बढ़ती ही जा रही हैं।
निर्माण सामग्री विक्रेता सतबीर शर्मा ने कहा कि दो से तीन माह पहले थोक में रेत की कीमते 25 से 26 रुपये प्रति फुट थी। जो आज बढ़कर 35 से 36 रुपये प्रति फुट हो गई है। बजरी की कीमत भी करीब 26 रुपये थी, जो आज 35 रुपये प्रति फुट है। कोरसेंट की कीमत 45 रुपये थी। जो आज 55 रुपये प्रति फुट है। सीमेंट 370 रुपये प्रति बैग था। जो आज 390 से 400 रुपये के बीच में है।
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रमेश कुमार ने कहा कि कीमतों में इतनी ज्यादा बढ़ोतरी का कारण अंडरलोड है। पहले एक ट्राले में 1200 फुट रेत आता था, जो आज घटकर 400 फुट रह गया है। साथ ही जहां से रेत आता है, वहां से भराई की कीमतों में कमी की बजाए बढ़ोतरी हो रही है। इन सब कारणों के कारण कीमतें बढ़ रही हैं। सरकार से मांग है कि वाहनों में जितनी उचित मात्रा में सामग्री आ सकती है, कम से कम उतनी अनुमति जरूर दें। ताकि लोग अपने निर्माण कार्य जारी रख सकेें।
इसी प्रकार से लोहा विक्रेता दुकानदार राहुल बंसल ने बताया कि सरिये की कीमतें 45-46 से बढ़कर 48 रुपये हो गए हैं। सीमेंट की कीमतों में भी 20 से 30 रुपये प्रति बैग बढ़ोतरी हुई है।
इसी प्रकार से मजदूर राजेश ने कहा कि दुकानों से रेत आदि लोड-अनलोड करने में 1000 से 1200 रुपये तक दिहाड़ी बन जाती थी, अब यह घटकर 300 से 400 रुपये रह गई है। जिसका कारण यह है कि लोगों ने चिनाई का काम ही कम कर दिया है। लोग इस उम्मीद में हैं कि कीमतें कम हों और वे चिनाई शुरू करें।
सरकारी ठेकेदार कृष्ण कुमार ने कहा कि निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी से 15 से 20 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है। स्टोन डस्ट की कीमतें 36 रुपये प्रति फुट तक हो गई हैं। जो 28 रुपये तक मिल जाती थी। जो ठेके पहले छूटे हुए थे, उन्हें पूरा करने में परेशानी हो रही है। प्रत्येक कार्य में ठेकेदार को 15 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हो रहा है। सीमेंट थोक में 340 में मिल जाता था, जो आज बढ़कर 80 रुपये हो गया है।
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