संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर में बेसहारा गोवंश और अन्य पशुओं की बढ़ती संख्या पर अब तक नगर परिषद और प्रशासन की निष्क्रियता सवालों के घेरे में है। समस्या से निपटने के लिए सरकार चार करोड़ का बजट जारी कर चुकी है पर हालात नहीं सुधरे। दिन और रात, दोनों समय शहर की सड़कों पर गाय और बैलों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आते हैं।
करनाल रोड, सेक्टर-18, प्यौदा रोड और पुराना बस स्टैंड जैसी व्यस्त सड़कों पर इनका जमावड़ा आम बात हो चुकी है। इन मवेशियों के कारण हर दिन वाहन चालकों को दुर्घटना का खतरा बना रहता है। कई बार झुंड के आपसी संघर्ष में अचानक सड़क पार करने या टकराने से हादसे हो जाते हैं। रात के समय स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, जब सड़क पर बैठे या दौड़ते पशु सामने आने से चालक असंतुलित होकर घायल हो जाते हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने मार्च और अप्रैल में जिले की 20 गोशालाओं के लिए लगभग चार करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की थी। यह राशि कृषि एवं पशुपालन विभाग की ओर से जारी की गई थी ताकि बेसहारा गोवंश की देखभाल और गोशालाओं की क्षमता बढ़ाई जा सके। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी उस समय कहा था कि गोमाता की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
मार्च माह में जिले के गोशाला संचालकों की बैठक में सरकार ने आर्थिक सहायता और चारा अनुदान पोर्टल शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन जमीनी नतीजे अब तक संतोषजनक नहीं हैं। कई गोशालाओं में जगह की कमी के चलते नए पशुओं को रखने से इन्कार किया जा रहा है। परिणामस्वरूप, ये बेसहारा मवेशी सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं।अब प्रशासन और नगर परिषद के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि अभियान चलाकर बेसहारा पशुओं को सड़क से हटाया जाएगा, लेकिन हकीकत यह है कि हालात जस के तस बने हुए हैं।