कैथल। जिले में तीन दिन पहले ही कैथल डिपो में एनसीआर जिलों से आई बीएस-3 व 4 तकनीक की बसें स्थानीय रूटों पर भी कामयाब नहीं हो पा रही हैं।
इस बसों के अधिक पुराना होने की स्थिति में यह रास्ते में ही रुक रही हैं। इस कारण यात्रियों को उनकी यात्रा में अधिक समय लग रहा है।
वहीं, इस मामले में रोडवेज यूनियन से जुड़े नेताओं का कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या को लेकर समाधान नहीं किया गया तो वे जिला स्तर पर एक बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
गौरतलब है कि इस समय एनसीआर जिलों से पहुंची बसों को स्थानीय रूटों में शामिल अंसध, चीका, पटियाला, पातड़ा, नरवाना और अन्य ग्रामीण रूटों पर भेजा जा रहा है।
वहीं, अब इस मामले में कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने भी सरकार को घेरा हैं। विधायक का कहना है कि सरकार ने कैथल की जनता के साथ ही खराब बसों को भेजकर जिले के यात्रियों के साथ अन्याय किया है।
रोडवेज के महाप्रबंधक कमलजीत चहल ने बताया कि सरकार के आदेशों के तहत ही बीएस- तीन व चार तकनीक की बसों को रूटों पर भेजा जा रहा है। ऐसी कोई अधिक समस्या इन नहीं मिली है। कोई इक्का-दुक्का बसों में यदि समस्या आई होगी तो उसे दुरुस्त करवाया जाएगा। उनके अनुसार इस संदर्भ मे जो सरकार के निर्देश होंगे वे ही माने जाएंगे। संवाद
रोडवेज कर्मचारी यूनियन के सदस्यों की जुबानी
बीच रास्ते में हो रहीं हैं बंद, हम रहते हैं परेशान
रोडवेज कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी परिचालक बलवान कुंडू ने बताया कि कैथल डिपो में आई बीएस-3 व 4 तकनीक की बसें रोडवेज अधिकारियों ने स्थानीय रूटों पर भेजना शुरू की है। यह बसें अधिक खराब होने की स्थिति में यह यात्रा के दौरान बीच रास्ते ही बंद हो रही है। ऐसे में चालक और परिचालक के साथ बस में सवार यात्री भी परेशान रहते हैं। कहा कि इन यात्रियों का आधे घंटे का सफर एक घंटे से अधिक समय में तय हो पा रहा है।
2010 से 2012 मॉडल की हैं बसें
रोडवेज कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी परिचालक महाबीर संधू ने बताया कि सरकार की ओर से बनाई गई कमेटी के निर्देशों पर जिन बीएस-3 व 4 तकनीक की बसों को कैथल डिपो में भेजा गया है। यह बसें 2010 से 2012 मॉडल की हैं। ऐसे में इनके बीच रास्ते में ही खराब होने की आशंका अधिक रहती हैं। इसका सीधा-सीधा खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
कभी ब्रेकडाउन तो कभी गियर में आ रही समस्या
रोडवेज के चालक कृष्ण किच्छाना ने बताया कि इन बसों में कभी ब्रेकडाउन तो कभी गियर में समस्या आ रही है। उन्होंने बताया कि बताया कि यह बसें तीन दिन पहले ही शनिवार को आई थी। इन्हें रविवार को ही रूटों पर भेजना शुरू कर दिया था। इन तीन दिन में अब तक करीब छह से आठ बसें बीच रास्ते में रुक गई हैं। इससे बस यात्रियों के साथ हमें भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
यात्रियों के साथ किया मजाक ः सुरजेवाला
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। वायु प्रदूषण के बढ़ने के बाद कैथल डिपो से एनसीआर जिलों में भेजी गई बसों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासत का वार तेज हो गया है। इस मामले में अब कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने भाजपा सरकार पर जनता के अधिकारों का हनन व परेशान करने का आरोप लगाया है।
कैथल से एक बयान जारी करते हुए विधायक आदित्य सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा की भाजपा सरकार व मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कैथल को खटारा बसों का उपहार देकर यात्रियों के साथ भद्दा मजाक और उनका अपमान किया है। साल 2022-2024 में कैथल में आई नई 48 बीएस-6 बसों को झज्जर, भिवानी व पानीपत भेजकर वहां से पुरानी बीएस-3 की बसों को कैथल भेज दिया है।
उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि पता नहीं मुख्यमंत्री नायब सैनी को कैथल की जनता से इतना द्वेष क्यों है कि टूटी खिड़की, टूटे शीशे व टूटी लाइटें से परिपूर्ण बसों को भेजकर यात्रियों को परेशान और दुर्घटनाग्रस्त किया जा रहा है। कैथल डिपो में आई सभी पुरानी बसों की खिड़की, टूटी पड़ी है। कई खिड़कियों पर जंग लगा हुआ है। कोई फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा नहीं है। आग बुझाने वाले यंत्र एक्सपायर हो चुके है।
उन्होंने कहा कि गियर बॉक्स भी सही से काम नहीं कर रहे है। फॉग लाइटें, पीली टेप की बसी में सुविधा नहीं है। सीटें टूटी पड़ी है। कवर खराब हो चुके हैं। कई बसों को बॉडी भी जर्जर हो चुकी है। कई बसों के टायर भी खराब हो चुके हैं, जिससे बस बीच रास्तों में ही खड़ी हो रही हैं। यात्री समयानुसार नहीं पहुंच पा रहे, घंटों घंटों खराब हुई बस का बीच रास्ते में ही ठीक होने का इंतजार करते रहते हैं। बीच रास्तों में ही बसों के शीशे टूट जाते हैं जिससे यात्री घायल हो जाते हैं।