संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। गांव क्योड़क निवासी अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज खिलाड़ी स्नेहा ने खेलों में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी सफलता ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव की सोच को बदल दिया है।
करीब सात साल पहले, जब स्नेहा ने बॉक्सिंग की शुरुआत की थी, तब वह गांव से अकेली ही अभ्यास के लिए कैथल आती थीं। आज उसी गांव से लगभग 30 खिलाड़ी बॉक्सिंग का अभ्यास करने कैथल आते हैं, जिनमें 15 लड़कियां शामिल हैं।
स्नेहा ने राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक पदक जीतकर गांव का नाम रोशन किया। उनके प्रदर्शन को देखकर ग्रामीणों ने अपनी बेटियों को भी खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। स्नेहा को देखकर ही गांव की एक अन्य खिलाड़ी ने भी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता है।
स्नेहा गांव की पहली लड़की बनी हैं, जिन्होंने खेल कोटे के आधार पर इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) में नौकरी हासिल की है। उन्होंने ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में स्वर्ण पदक भी जीता है।
वह इन दिनों अंबाला रोड स्थित रकेएसडी कॉलेज में चल रहे बॉक्सिंग सेंटर पर कोच राजेंद्र सिंह, विक्रम ढुल और गुरमीत सिंह के मार्गदर्शन में अभ्यास करती हैं। स्नेहा युवाओं को खेलों के प्रति जागरूक करने का काम भी कर रही हैं।
गांव कैथल से करीब दस किलोमीटर दूर है, लेकिन स्नेहा हर दिन सुबह और शाम दोनों समय स्टेडियम पहुंचती थीं। उनके पिता चरण सिंह किसान हैं, जबकि मां सुमन देवी और भाई लक्ष्य उनका पूरा सहयोग करते हैं। स्नेहा का चचेरा भाई रोनित भी उनके प्रेरणास्रोत से प्रभावित होकर बॉक्सिंग खेलने लगा है।
स्नेहा की उपलब्धियां
2019: जूनियर राष्ट्रीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता, रोहतक - कांस्य पदक
2020: खेलो इंडिया, असम - कांस्य पदक
2021: राष्ट्रीय प्रतियोगिता, सोनीपत - रजत पदक
2022: खेलो इंडिया, पंचकूला -कांस्य पदक
2022: यूथ एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप, जॉर्डन - कांस्य पदक (पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता)
2023: राष्ट्रीय स्पर्धा, चेन्नई - रजत पदक
2024: राष्ट्रीय पुलिस खेल, लखनऊ - कांस्य पदक