कैथल। कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने हरियाणा विधानसभा के अंतिम दिन शून्य काल में बिजली क्षेत्र के प्रस्तावित निजीकरण के लिए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली लाइसेंस देकर पिछले दरवाजे से बिजली विभाग के निजीकरण की तैयारी कर रही है।
सुरजेवाला ने कहा कि जिस कंपनी को बिजली वितरण का काम सौंपने की तैयारी है, वह केवल एक साल पुरानी है। कंपनी के पास बिजली वितरण का कोई अनुभव नहीं है और उसकी पूंजी भी मात्र एक करोड़ रुपये है। इसके बावजूद उसे 4,717 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह भ्रष्टाचार का खुला सबूत नहीं है। विधायक ने आरोप लगाया कि निजी कंपनी केवल मॉल, बड़ी इंडस्ट्री और बड़ी सोसाइटियों जैसे मुनाफे वाले उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करेगी, जबकि गांवों, किसानों के ट्यूबवेलों और छोटे दुकानदारों को इससे कोई लाभ नहीं मिलेगा।
उन्होंने इसे सार्वभौमिक बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे मुनाफा निजी कंपनी को और घाटे का बोझ आम जनता पर पड़ेगा। सुरजेवाला ने कहा कि अकेला गुरुग्राम दक्षिणी हरियाणा बिजली वितरण निगम के राजस्व में करीब 40 प्रतिशत योगदान देता है। यदि यह राजस्व निजी कंपनी के पास चला गया तो किसानों के नए ट्यूबवेल कनेक्शन, गांवों में जले ट्रांसफॉर्मर बदलने और गरीबों व किसानों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी पर असर पड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि निगम को घाटे में पहुंचाने के बाद सरकार भविष्य में उसके निजीकरण का तर्क दे सकती है जिससे हजारों सरकारी कर्मचारियों की नौकरियां भी खतरे में पड़ सकती हैं। सुरजेवाला ने भाजपा सरकार से प्रस्तावित समानांतर बिजली लाइसेंस को तुरंत रद्द करने की मांग की।
आदित्य सुरजेवाला