संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर के जवाहर पार्क स्थित बाबा शाह कमाल लाल दयाल कादरी की दरगाह हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है। इस दरगाह में खास बात यह है कि दरगाह के पुजारी हिंदू हैं और यहां पर पूजा-अर्चना करने के लिए हर धर्म के लोग पहुंचते हैं।
बाबा रजनीश ने बताया कि बाबा शाह कमाल कादरी साहब सैंकड़ो वर्ष पूर्व जब बगदाद से घूमते हुए मुल्तान पहुंचे और वहां से सरहिंद में बाबा लगभग पांच वर्षों तक रहे। उनकी मुलाकात बाबा लाल दयाल से हुई। बाबा लाल दयाल से अपने अच्छे संबंधों के कारण बाबा शाह कमाल ने नाम के साथ कमाल शाह लाल दयाल जोड़ लिया। बाद में बाबा शाह कमाल कैथल में आकर बस गए।
इस दरगाह परे बाबा शाह कमाल साहब के परिवार के अन्य सदस्यों की दरगाह भी सैंकड़ों वर्षो से स्थापित है। जब दशहरे पर डेरा बाबा पर शीतल पुरी पर मेला लगता है। तो बाबा शाह कमाल की दरगाह से पहली पगड़ी ले जाकर बाबा शीतलपुरी पर समाधि पर चढ़ाई जाती है।
मान्यता है कि उर्स मेले में दरगाह पर पहली चादर शीतलपुरी डेरे की ही चढ़ाई जाती है। सैंकड़ों वर्षों से प्रत्येक वीरवार के दिन यहां भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ता है और लोग बड़ी आस्था के साथ बाबा की दरगाह पर माथा टेकते हैं और मन्नत मांगते हैं। इस मौके पर सुभाष ठुकराल, नवीन, संजू, राजेश, कुलान आदि मौजूद रहे।
आज से मेला ः इस दरगाह पर वीरवार से लेकर 30 मार्च तक तीन दिवसीय उर्स मेला शुरू होगा।। इसमें यूपी, दिल्ली से आए कव्वाल बाबा का गुणगान करने के लिए दरगाह पर पहुंचेंगे। गद्दी नशीन बाबा रजनीश शाह ने बताया कि उनसे पहले उनके पिताजी बाबा कुलवंत शाह वर्ष 1985 से 2014 तक यहां पर गद्दीनशीन रहे थे। इसके बाद अब वे यहां सेवा कर रहें हैं। बताया कि जवाहर पार्क में चलने वाले तीन दिवसीय उस मेले की पूरी तैयारी हो चुकी है। दरगाह को रंगीन लाइटों व यूपी से मंगवाए लगभग सात क्विंटल विभिन्न रंग-बिरंगे फूलों से दरगाह को सजाया गया है। सालाना में उर्स मेले तीनों दिन से चलने वाले भंडारे में बारिश को लेकर पार्क में वाटर प्रूफ पंडाल बनाया गया है।
वीरवार को दोपहर दो बजे दरगाह पर बाबा का स्नान किया जाएगा। शाम पांच बजे डेरा बाबा शीतल पुरी से पहली चादर महंत निरंजनपुरी की ओर से चढ़ाई जाएगी। रात में सहारनपुर से नुसरत साबरी, तशलिम साबरी व लुधियाना से शौकत साबरी अपनी कव्वालियों से समां बांधेंगे।