संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/कलायत। शिवरात्रि पर नगर में विभिन्न स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। भोले नाथ का अनेक स्थानों पर गन्ने के रस, पंचामृत व गंगाजल से महारुद्राभिषेक करवाया गया।
पंडित विशाल शांडिल्य ने कहा कि विश्व के प्राचीनतम सत्य-सनातन वैदिक हिन्दू धर्म में भगवान शिव को मृत्युलोक का प्रमुख देव माना गया है। इसलिए हम उन्हें देवों के देव महादेव भी कहते हैं। भगवान शिव को ही आदि, अनादि, अनंत, अजन्मा माना गया है। इसलिए वह आरंभ और अंत से रहित तथा सभी कारणो के भी प्रमुख कारण और सबको उत्पन्न करने वाले हैं। केवल वही जन्म और मरण से रहित कालों के भी काल महाकाल अर्थात न उनका जन्म हुआ है और न ही वह मृत्यु को प्राप्त होते हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार भगवान शिव केवल अवतार पुरुष न होकर साक्षात परब्रह्म परमात्मा ईश्वर ही हैं। शिव जी की साकार मूर्तिरुप व निराकार अमूर्त दोनों रुप में आराधना की जाती है। प्राचीन शास्त्रों में भगवान शिव का चरित्र अत्यंत मंगलदायी तथा कल्याणकारी माना गया है। उनके दिव्य चरित्र और गुणों के कारण भगवान शिव निराकार व साकार दोनों ही रूपों में सर्वत्र पूजित हैं। धर्मशास्त्रों में शिव के रूपों से जुड़े अनेक नाम आते हैं।
धार्मिक आस्था से इन शिव नामों का ध्यान मात्र भी अति शुभ फलदायी होता है। शिव के इन सभी रूप और सभी नामों का स्मरण मात्र ही भक्तो के सभी दु:ख और कष्टों को दूर कर उनकी हर इच्छा पूर्ण करने वाला माना गया है। शिवरात्रि पर इन नामों के जाप के साथ महारुद्राभिषेक करवाने से मानव के तमाम कष्ट बाबा भोलेनाथ हर लेते हैं।