रेलवे रोड पर लगाई गई छबील में जलसेवा करते युवा
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कलायत। परमा एकादशी के अवसर पर कपिल मुनि तीर्थ में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर अपने इष्ट देवों की पूजा कर दान पुण्य किया। नगर में अनेक स्थानों पर ठंडे मीठे जल की छबीलें लगाई गईं।
रेलवे रोड पर शेखर शर्मा परिवार की ओर से लगाई गई छबील पर युवाओं ने जल सेवा की। शेखर शर्मा ने बताया कि छबील में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि किसी भी प्रकार के डिस्पोजेबल गिलास का प्रयोग न हो। डिस्पोजल से पर्यावरण दूषित होता है।
पूर्व पार्षद राजू कौशिक ने कहा कि गर्मी के मौसम में जलसेवा कर लोगों की प्यास बुझाने में जो अलौकिक आनंद मिलता है उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। परम एकादशी पर अनेक स्थानों पर भंडारों का भी आयोजन किया गया।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष 24 एकादशियां होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। अधिक मास में दो एकादशी होती है जो परमा और पद्मिनी के नाम से जानी जाती हैं। अधिक मास में कृष्ण पक्ष में जो एकादशी आती है वह हरिवल्लभ और परमा एकदशी के नाम से जानी जाती हैं। परमा एकादशी हिंदू धर्म का एक अत्यंत विशिष्ट और दुर्लभ व्रत है जो हर तीन साल में एक बार आने वाले पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष में आता है। इसी के प्रभाव से कुबेर देवता को देवत्व और अपार धन की प्राप्ति हुई थी। इस व्रत में भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है जिसमें धूप, दीप, नैवेद्य और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं। इस व्रत में रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन का विशेष महत्व है।
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