कैथल। एसीबी टीम ने वीरवार दोपहर को रिश्वत के मामले में कोऑपरेटिव सोसाइटी के सहायक रजिस्ट्रार ऋषि महाजन को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। इस मामले में संलिप्तता के आरोप में इंस्पेक्टर जसबीर को भी गिरफ्तार किया गया है। विजिलेंस इंस्पेक्टर सूबे सिंह बताया कि गांव पाडला निवासी मांगेराम ने अपनी शिकायत में कहा कि वह अपने पोते अभिमन्यु को पैक्स में नौकरी दिलवाना चाहते थे। करीब दो साल पहले पैक्स में भर्ती निकली थी, लेकिन नौकरी दिलाने के लिए अधिकारियों ने उनसे एक लाख रुपये की मांग की थी। अपने पोते की नौकरी के लिए मांगेराम ने पहले ही 70 हजार रुपये इंस्पेक्टर जसबीर को दे दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने इसके बाद और अधिक रकम की मांग शुरू कर दी। जब उन्हें लगा कि रिश्वत के दबाव के बावजूद स्थिति नहीं सुधर रही, उन्होंने एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के बाद एसीबी की टीम ने एक योजना बनाई। पीड़ित मांगेराम को 30 हजार रुपये लेकर सहायक रजिस्ट्रार ऋषि महाजन के पास भेजा गया। जब ऋषि महाजन को पैसे सौंपे गए, उसी समय एसीबी टीम ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया, इसके बाद इंस्पेक्टर जसबीर को भी गिरफ्तार किया गया। दोनों गिरफ्तार अधिकारियों से पूछताछ के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसीबी के इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने बताया कि दोनों अधिकारियों से पूछताछ जारी है। एसीबी अब यह भी जांच कर रही है कि कितने और युवाओं को नौकरी दिलाने के लिए रिश्वत ली गई थी और किन लोगों के साथ उनकी सांठ-गांठ थी। बता दें कि करीब एक साल पहले कैथल के ग्रामीण क्षेत्रों में दो को-ऑपरेटिव सोसायटियों में लगे 11 कर्मचारियों की भर्ती फर्जी पाई गई थी। इनमें कुराड पैक्स के 6 और पाडला पैक्स के 5 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया था। ये सेल्समैन, क्लर्क और चतुर्थ श्रेणी के पद पर लगे थे।
पहले भी दो लाख रुपये, किसी से 3 लाख रुपये लिए
मांगेराम ने आरोप लगाया कि पहले भी कई युवाओं को नौकरी लगवाने के लिए ऋषि महाजन और इंस्पेक्टर जसबीर ने रिश्वत ली थी। उन्होंने बताया कि 8 से 10 युवाओं ने इस प्रक्रिया के जरिए नौकरी पाई और इनमें से किसी से 2 लाख रुपये, किसी से 3 लाख रुपये लिए गए। शिकायतकर्ता ने बताया कि पहले भी कई युवाओं से रिश्वत लेकर नौकरी लगवाई गई थी। पिछले मामलों में पता चला कि आरोपी अधिकारियों ने कम पढ़े-लिखे युवाओं से बड़ी रकम लेकर उन्हें नौकरी दिलवाई थी। यह साफ संकेत है कि यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि दोनों अधिकारियों की लंबे समय से चल रही गतिविधियों का हिस्सा है।
पीड़ित की प्रतिक्रिया
मांगेराम ने कहा कि अपने पोते की नौकरी के लिए उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने बार-बार अधिक रुपये की मांग की। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह की कार्रवाई भविष्य में युवाओं के साथ अन्याय को रोकेगी।