सीवन/ कैथल। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से जिले के ऐतिहासिक पोलड़ गांव के 206 घरों को खाली करने का नोटिस दिया गया है। नोटिस मिलने के बाद गांव की एक महिला की मौत हो गई। महिला गुरमीत कौर आंगनबाड़ी कर्मचारी थीं। इतिहासकारों के अनुसार,पोलड़ गांव रावण के दादा पुलस्त्यमुनि की तपोस्थली रहा है। अदालत में विभाग की याचिका के बाद ही गांव को खाली करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
परिजनों के अनुसार, शनिवार को जब उन्हें मकान खाली करने का नोटिस मिला। तब से वे मानसिक रूप से काफी परेशान थीं। रविवार सुबह महिला की तबीयत बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। गांव में इस घटना को लेकर शोक और रोष है।
गांव की आबादी है छह हजार
पोलड गांव को नगर पालिका सीवन के गठन के समय इस सीवन में शामिल कर दिया गया था। बाद में ग्रामीणों के विरोध के बाद इस सीवन नगर पालिका से हटा दिया गया। पोलड़ में करीब दो हजार मतदाता हैं और गांव की आबादी छह हजार के करीब है। पोलड़ गांव में अधिकतर जनसंख्या अनुसूचित जाति से संबंध रखती है।
ग्रामीणों बोले, पूर्वजों की जमीन नहीं छोड़ेंगे
ग्रामीणों का कहना है कि वे भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय यहां बसे थे और तभी से गांव में रह रहे हैं। अब तक गांव में पुरातत्व विभाग की ओर से तीन बार खुदाई की जा चुकी है, लेकिन कोई ऐतिहासिक अवशेष नहीं मिले। इसके बावजूद उन्हें बेघर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसे वे अन्यायपूर्ण मानते हैं।
विधायक से मिले ग्रामीण,मिला आश्वासन
ग्रामीणों ने रविवार को गुहला से कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस को ज्ञापन सौंपते हुए आग्रह किया कि गांव को खाली कराने के आदेशों को रद्द करवाया जाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपने घर किसी भी हालत में नहीं छोड़ेंगे। यह हमारी पूर्वजों की धरोहर है। हम यहां से हटेंगे नहीं, चाहे कुछ भी हो जाए। विधायक देंवेंद्र ने कहा कि गांव को उजड़ने नहीं देंगे। इस बारे में सीएम नायब सैनी व पुरातत्व विभाग के आला अधिकारियों से बातचीत की जाएगी।
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धार्मिक महत्व से जुड़ा है पोलड़ गांव
- इतिहासकारों के अनुसार, रावण के दादा पुलस्त्य मुनि की तपोस्थली है यह
- मुनि ने सरस्वती नदी के किनारे स्थित इक्षुपति तीर्थ पर तपस्या करने की है मान्यता
अमित तनेजा/संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। पुरातत्व विभाग की ओर से नोटिस देने के बाद यह पोलड़ गांव एक बार फिर से चर्चा में आ गया है। इस गांव को धार्मिक व ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
इतिहासकारों के अनुसार, यह स्थल रावण के दादा पुलस्त्यमुनि की तपोस्थली रहा है। मान्यता है कि पुलस्त्य मुनि ने यहां सरस्वती नदी के किनारे स्थित इक्षुपति तीर्थ पर तपस्या की थी। रावण का बचपन इसी स्थान पर बीता। गांव में स्थापित सरस्वती मंदिर और सैंकड़ों वर्ष पुराना शिवलिंग इस स्थल की प्राचीनता को दर्शाते हैं। मंदिर की देखरेख कर रहे महंत देवीदास के अनुसार मंदिर का निर्माण महंत राघवदास ने एक स्वप्न के आधार पर करवाया था।
पोलड़ की जमीन को ऐतिहासिक घोषित करते हुए पुरातत्व विभाग ने पूर्व में कई बार खोदाई करवाई है। विभाग का कहना है कि यहां अति प्राचीन व दुर्लभ वस्तुएं मिल सकती हैं, इसलिए संरक्षित किया जाना जरूरी है। कोर्ट में विभाग की याचिका के बाद ही गांव को खाली करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पोलड़ एक प्राचीन नगर था
इतिहासकार प्रो. बीबी भारद्वाज बताते हैं कि यह स्थान एक प्राचीन नगर था, जो प्राकृतिक आपदा के कारण उजड़ गया। बाद में इसे पुनः बसाया गया और इसका नाम ''थेह पोलड़'' पड़ा। “थेह” का अर्थ होता है वह स्थान जहां कभी कोई बस्ती रही हो।
न्यायालय जाने की चेतावनी
गांववासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई, तो वे कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेंगे। प्रदर्शन, धरना और न्यायालय तक जाने की योजना भी बना रहे हैं। सरकार यदि वाकई संरक्षण चाहती है, तो पहले उन्हें बसाने की योजना पेश करे।
डीसी का वर्जन, पोलड़ वाले समाचार में
पोलड़ गांव में लोगों को मिले नोटिस के संदर्भ डीसी प्रीति ने बताया कि यह जानकारी मीडिया के माध्यम से ही संज्ञान में आई है। इस मामले में पुरातत्व विभाग से जानकारी लेने के बाद ही कुछ स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
112 कैथल। पोलड़ गांव से स्थित सरस्वती मां का मंदिर। संवाद