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Kaithal News: सुदृढ़ सांस्कृतिक विरासत को सराहा

Sat, 17 Jan 2026 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जिला लाइब्रेरी में बुधवार को पंचनद अध्ययन केंद्र की मासिक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक के मुख्य वक्ता डॉ. कृष्णचंद पांडे ने भारतीय इतिहास और राष्ट्र की सांस्कृतिक अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग पंद्रह सौ वर्षों के संघर्षों, आक्रमणों और विदेशी शासन के बावजूद भारत की राष्ट्रीय चेतना समाप्त नहीं हुई, जिसका मूल कारण इसकी सुदृढ़ सांस्कृतिक विरासत है।
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डॉ. पांडे ने बताया कि अंग्रेजों ने यह समझ लिया था कि भारत को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से अलग किए बिना उस पर शासन संभव नहीं है, इसी कारण भारतीय ग्रंथों, शिक्षा व्यवस्था और भाषाओं के अध्ययन व अनुवाद की योजनाबद्ध प्रक्रिया शुरू की गई। इस संदर्भ में उन्होंने मोनियर विलियम्स, मैक्समूलर और मैकाले की नीतियों का उल्लेख किया। डॉ. पांडे ने कहा कि यूरोप में राष्ट्र की अवधारणा मुख्य रूप से राज्य और राजनीतिक व्यवस्था तक सीमित रही, जबकि भारत में राष्ट्र की संकल्पना संस्कृति, धर्म, कर्तव्य और सामाजिक चेतना पर आधारित रही है। उन्होंने बताया कि वैदिक काल से ही भारत एक सांस्कृतिक राष्ट्र रहा है, जिसका उल्लेख वेदों और महाभारत में मिलता है। उन्होंने कहा कि भारत राजनीति से नहीं, बल्कि संस्कृति से राष्ट्र बना है। कुंभ, चारधाम यात्रा, तीर्थ परंपराएं, भारत माता की जय और वंदे मातरम् जैसे उद्घोष देश को सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में बांधते हैं। भाषा की विविधता के बावजूद भारत सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना हुआ है।
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