संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। केंद्र सरकार की ओर से लाई नई कृषि विपणन नीति के खिलाफ हरियाणा के किसान संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने जल्द समस्याओं का समाधान नहीं किया तो 20 मार्च को कुरुक्षेत्र स्थित मुख्यमंत्री के आवास पर किसान महापंचायत करेंगे।
इस संबंध में भाकियू प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने कलायत उपमंडल के गांवों में जनसंपर्क अभियान को गतिमान कर किसानों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पंजाब की तरह से केंद्र की कृषि विपणन नीति को अस्वीकार करके किसान हितैषी होने का प्रमाण दे।
उन्होंने कहा कि चल रहे विधानसभा सत्र में प्रदेश की भाजपा सरकार नई कृषि विपणन नीति को पटल पर रख कर पक्ष विपक्ष की चर्चा करवाए और इसे प्रदेश में लागू न करने का निर्णय ले। मान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार यह नीति औद्योगिक लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए लाई है जिससे अनाज मंडियां खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के साथ धोखा कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार तीन कृषि कानून के प्रावधानों को नए रूप में लागू करने की कोशिश कर रही है। इससे मजदूरों, किसानों और मंडियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। सरकार को चाहिए कि मंडियों का और ज्यादा विस्तार करें लेकिन इसके बजाय उन्हें कमजोर करने का काम किया जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन ने मांग की है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पंजाब सरकार की तर्ज पर नीति को रद्द कर केंद्र सरकार को लौटा दें नहीं तो कुरुक्षेत्र स्थित मुख्यमंत्री के आवास पर 20 को महापंचायत करेंगे।
मान ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 25 नवंबर 2024 को जारी की गई कृषि विपणन पर राष्ट्रीय नीति को हरियाणा विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर इसे प्रदेश में लागू न किया जाए। सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करके कानून बनाया जाए।
इसके अलावा प्रदेश में जहां ओलावृष्टि के कारण से फसल बर्बाद हुई है वहां स्पेशल गिरदावरी करवा कर सरकार 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दे। यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो गांव से लेकर प्रदेश तक बड़े प्रदर्शन होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी भाजपा सरकार की होगी। इस मौके पर रतन मान, सुरेंद्र चौशाला, प्रीतम लांबा, खेड़ी जोगिंदर, नर सिंह, राजकुमार आदि मौजूद रहे।