संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। इंदिरा गांधी पब्लिक स्कूल में मंगलवार को हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की राज्य स्तरीय परियोजना बाल सलाह, परामर्श एवं कल्याण केंद्र की स्थापना के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस सेमिनार में मुख्य वक्ता मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी रोहतक एवं राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक रहे। उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षाओं के परिणाम जीवन के अंतिम परिणाम नहीं है इसलिए हमेशा बेहतर करने का प्रयास जारी रखें चाहे जो भी परिणाम हासिल हों।
उन्होंने कहा कि परीक्षा कैसी होगी, परिणाम कैसा रहेगा, ग्रेड या अंक कितने हासिल होंगे ऐसे बहुत से सवाल विद्यार्थियों को परेशान करने लगते हैं, लेकिन सवाल यह है कि समाधान क्या हो। मलिक ने बताया कि सबसे पहले तो किशोरावस्था के दौरान मन के भटकाव, अध्ययन करते हुए एकाग्रता का अभाव आदि व्यवधान जो होते हैं, उनको समझना होगा। हार्मोन बदलाव और भावनात्मक विकास की उम्र है। दोस्तों की प्रवृति और संगति को समझना होगा, आपका सामाजिक माहौल कैसा है, उसे सही से समझकर परिवर्तन के सार्थक प्रयास करने होंगे, अपनी रुचियां और आदतों को सही से जानना होगा।
उन्होंने कहा कि आपकी खूबियां क्या हैं, विशेषता क्या है, कमजोरी क्या है, जानें और आवश्यकता अनुसार सुधारें। ऊर्जा अगर घट रही है, व्यर्थ हो रही है तो कारण समझ में आना चाहिए। परीक्षा की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आती है, चिंता का स्तर बढ़ता है समझ नहीं आ रहा या तैयारी नहीं की है या अन्य कोई और कारण। सही से अगर समझें तो पढ़ाई बोझ बढ़ाने के लिए नहीं बोझ को हल्का करने के लिए होती है। उन्होंने कहा कि आज की मुलाकात का उद्देश्य ही यह है कि ज्ञान को बोझ न समझे, बल्कि ज्ञान के सहारे आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि परीक्षा के तनाव से बचने के लिए परीक्षा के फॉर्मेट, मार्किंग, स्कीम को सही से समझें, स्टडी प्लान बनाएं, पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र हल करके देखें यानि कि खुद का मॉक टेस्ट लेते रहें, छोटे-छोटे ब्रेक के साथ टाइम स्लॉट में पढ़ाई करें, बेहतर प्रदर्शन हेतु सकारात्मक मानसिकता का विकास करें, नियमित अभ्यास, सफलता को विजुलाइज करें, परीक्षा के दौरान शांत मन से प्रश्न को समझते हुए उत्तर लिखें और जो भी परिणाम हासिल हो सहर्ष स्वीकारें।
कार्यक्रम में विशेष तौर पर जींद से पहुंचे परामर्शदाता नीरज कुमार ने भी संबंधित विषय पर उपस्थित बच्चों का सरल प्रायोगिक तरीकों से मार्गदर्शन करते हुए उन्हें प्रेरित किया। जिला बाल कल्याण अधिकारी बलबीर सिंह चौहान ने बताया कि अगर विद्यार्थी शैक्षणिक स्तर के शुरुआत से ही विषयों को समझते हुए आगे बढ़े तो परीक्षा का समय ज्यादा कठिन महसूस नहीं होगा। उपप्राचार्य रंजू गुप्ता ने कहा कि सेमिनार में दिए गए सुझाव बच्चों के लिए सहायक साबित होंगे।
विशेष अतिथि के रूप में पहुंचे यातायात एवं महिला थाना इंचार्ज उप पुलिस अधीक्षक सुशील प्रकाश ने संबोधित किया। इस मौके पर बाल कल्याण परिषद के आजीवन सदस्य नीरज कुमार, जिला बाल कल्याण विभाग से सहायक कार्यक्रम अधिकारी कांता चहल, सुशील, ऋषिराज, मनीष के साथ-साथ सभी अध्यापक मौजूद रहे।