कैथल। रोडवेज डिपो की वर्कशॉप में तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण बसों के रखरखाव पर असर पड़ रहा है। डिपो में टायरमैन के स्वीकृत नौ पदों में से छह लंबे समय से रिक्त हैं। ऐसे में केवल तीन नियमित टायरमैन ही 152 बसों के टायरों की जांच, मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वहीं सहायक टायरमैन के पांचों स्वीकृत पद भी खाली होने से कार्य का दबाव और बढ़ गया है।
स्टाफ की कमी दूर करने के लिए डिपो प्रशासन फिलहाल आईटीआई के अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं की मदद ले रहा है। हालांकि अनुभवी कर्मचारियों की कमी पूरी नहीं हो पा रही है, क्योंकि बसों के रखरखाव और तकनीकी कार्यों के लिए दक्ष कर्मियों की आवश्यकता होती है। इससे नियमित कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई है। डिपो में संचालित सभी बसों के टायरों की समय-समय पर जांच और मरम्मत सड़क सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कर्मचारियों का कहना है कि सीमित स्टाफ के कारण उन्हें कई बार निर्धारित समय से अधिक ड्यूटी करनी पड़ती है ताकि बसों का संचालन प्रभावित न हो। यात्रियों और कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि खाली पदों पर जल्द नियमित भर्ती की जाए। उनका कहना है कि पर्याप्त तकनीकी स्टाफ उपलब्ध होने से बसों का रखरखाव बेहतर होगा, सेवाएं अधिक सुचारु रहेंगी और यात्रियों की सुरक्षा भी मजबूत होगी।
हर महीने कर्मचारी हो रहे सेवानिवृत्त
विभाग से लगातार कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं लेकिन रिक्त पदों पर नई नियुक्तियां नहीं हो रही हैं। इससे तकनीकी शाखा के साथ-साथ परिचालन व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है।
कर्मचारियों की कमी के बारे में मुख्यालय को अवगत करवा दिया गया है। जल्द नई भर्ती होने की उम्मीद है।- अनिल कुमार, वर्कशॉप मैनेजर