संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के छह युवा अमेरिका से डिपोर्ट होकर लौटे हैं, लेकिन वे घर नहीं रिश्तेदारी में रह रहे हैं। उनके परिजनों की खून-पसीने की कमाई अब खो चुकी है। हर युवा ने लगभग 45–50 लाख रुपये खर्च किए, यानी कुल मिलाकर करीब तीन करोड़ रुपये। यह पैसा पुश्तैनी जमीन बेचकर, कई ने प्लाट या अन्य संपत्तियां गिरवी रखकर एजेंटों को दिया था।
डिपोर्ट होने के बाद ये युवा घर तक भी नहीं लौट रहे हैं। वे रिश्तेदारी में जा रहे हैं ताकि किसी को जवाब देने की स्थिति न बने। फिलहाल किसी ने भी एजेंटों के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं करवाई है। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि अधिकांश एजेंट या तो रिश्तेदार हैं या पारिवारिक जानकार। कुछ लोग तर्क देते हैं कि एजेंट ने तो अमेरिका तक पहुंचा दिया, डिपोर्ट होने में उसकी कोई गलती नहीं। ऐसे में एजेंट सुरक्षित हैं, जबकि युवाओं और उनके परिवारों को भारी नुकसान हुआ।
अमेरिका जाने वाले अधिकतर लोग ड्राइवरी, माली, शोरूम हेल्पर, लकड़ी और बिजली के काम करते हैं। अब अमेरिका में नियम सख्त हो गए हैं, और नियमों का उल्लंघन करने वाले युवाओं को तलाश कर डिपोर्ट किया जा रहा है। अमेरिका में रह रहे करनाल के विनोद शर्मा ने बताया कि अमेरिका ने हाल के वर्षों में अपनी इमीग्रेशन नीति कड़ी कर दी है। इसलिए जो लोग नियमों के खिलाफ यहां रह रहे हैं, उनको तलाश कर डिपोर्ट किया जा रहा है।