कैथल। गुहला चीका के एक कॉलेज की कैंटीन में बेटी को फोन करने के बहाने छात्रा से मोबाइल लेकर भागने के मामले में गुहला अदालत ने आरोपी हरपिंदर सिंह को धारा 406 के तहत दोषी करार दिया है। वहीं धारा 201 के आरोप में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उसे बरी कर दिया गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राजविंदर सिंह की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
बेटी से बात करने के बहाने मांगा था मोबाइल
अदालत के अनुसार शिकायतकर्ता सिमरन बीकॉम की छात्रा थी। 1 दिसंबर 2020 को वह कॉलेज की कैंटीन में मौजूद थी। इस दौरान एक व्यक्ति उसके पास आया और अपनी बेटी को फोन करने की बात कहकर मोबाइल मांगा। छात्रा ने उसे फोन दे दिया लेकिन वह मोबाइल लेकर वहां से भाग गया। शिकायत के आधार पर चीका थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच की।
सीडीआर से आरोपी तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल के आईएमईआई नंबरों के आधार पर साइबर सेल से सीडीआर प्राप्त की। इसके बाद 10 फरवरी 2021 को मोबाइल आरोपी की पत्नी से बरामद किया गया। पुलिस ने आरोपी हरपिंदर सिंह को जांच में शामिल कर उसके बयान के आधार पर मोबाइल और घटनास्थल की पहचान की कार्रवाई भी कराई। मामले में अभियोजन पक्ष ने नौ गवाह पेश किए। शिकायतकर्ता ने अदालत में आरोपी की पहचान की और घटना के संबंध में गवाही दी। अदालत ने माना कि दोनों की गवाही एक-दूसरे से पुष्ट होती है। मोबाइल की बरामदगी और उसकी पहचान से भी अभियोजन का पक्ष मजबूत हुआ।
धारा 201 का आरोप साबित नहीं हुआ
अदालत ने कहा कि धारा 201 के तहत अभियोजन का मामला मुख्य रूप से इस आधार पर था कि मोबाइल की सिम क्षतिग्रस्त कर दी गई थी। हालांकि क्षतिग्रस्त सिम बरामद नहीं हुई और इसके संबंध में स्वतंत्र साक्ष्य भी सामने नहीं आया। इसलिए आरोपी के खिलाफ धारा 201 के आरोप को संदेह से परे साबित नहीं माना गया और उसे इस आरोप से बरी कर दिया गया।
अदालत ने पाया कि छात्रा ने सीमित उद्देश्य से आरोपी को मोबाइल सौंपा था लेकिन उसने फोन वापस नहीं किया और उसे अपने पास रख लिया। मोबाइल की बरामदगी समेत अभियोजन साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराया है।