संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। फरल गांव में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के छात्रों को पुरातात्विक अन्वेषण के दौरान बलुआ पत्थर की धड़ से टूटी हुई शेर जैसी प्रतिमा मिली है। इसे बहुत ही सुंदरता तराशा गया है। प्रतिमा में धड़ से लेकर पीछे का भाग ही सुरक्षित है, लेकिन सिर वाला हिस्सा गायब है। यह प्रतिमा किस काल की हो सकती है, इसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
गौरतलब है कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के छात्र जसबीर सिंह व उसके सहयोगी विनोद कुमार काफी अरसे से गांव फरल में पुरातत्विक अन्वेषण कर रहे हैं। इससे पहले अगस्त में भी इन्हें यहां पर नौवीं और 10वीं शताब्दी की पत्थर की प्रतिमाएं मिल चुकी हैं। इसके करीब डेढ़ महीने बाद इन विद्यार्थियों को फिर से यह सफलता
मिली है।
इस बार जसबीर और विनोद टीला नंबर फरल-2 पर पहुंचे तो उन्हें तालाब से मिट्टी में हलके गुलाबी व लाल रंग के बलुआ पत्थर की धड़ से टूटी हुई शेर जैसी प्रतिमा मिली। इस तराशी प्रतिमा के टांगों वाले भाग की चौड़ाई 24 सेंटीमीटर, लंबाई -28 सेंटीमीटर, धड़ की गोलाई 59.6 सेंटीमीटर और धड़ वाले भाग की चौड़ाई 18.6 सेंटीमीटर है। उन्होंने बताया कि प्रतिमा का धड़ से लेकर पीछे का भाग ही सुरक्षित है, लेकिन सिर वाला हिस्सा गायब है। प्रतिमा कितनी पुरानी है, इस संबंध में जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। करीब डेढ़ माह पहले अगस्त में विद्यार्थियों को टीला नंबर फरल-2 से प्राचीन शिव मंदिर की तरफ से नौवीं व 10वीं शताब्दी की पत्थर की प्रतिमाएं मिली थीं।