निवर्तमान प्रधान व पांच बार पूर्व प्रधान के बीच हो सकता है नई अनाज मंडी में आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान पद के लिए मुकाबला
कृष्ण मित्तल व सुरेश चौधरी मैदान में
नई अनाज मंडी में आयोजित आढ़ती एसोसिएशन की बैठक में किया गया एलान, रामनिवास खुरानिया को बनाया गया चुनाव अधिकारी
वीरवार 7 मार्च को होगी वोटिंग, आज नामांकन पत्र भरने का अवसर
फोटो संख्या-18 व 19
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के लिए निवर्तमान प्रधान कृष्ण मित्तल व पांच बार प्रधान रहे चौधरी सुरेश गर्ग के बीच मुकाबला हो सकता है। सोमवार को नई अनाज मंडी में स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में निवर्तमान प्रधान कृष्ण मित्तल ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। इससे पूर्व उन्होंने अपने एक साल के कार्यकाल में करवाए गए कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया।
कृष्ण मित्तल ने कहा कि वे समझते हैं कि आढ़तियों की रोजी-रोटी के लिए सबसे आवश्यक उनके लाइसेंस की समस्या का समाधान करवाना उनकी प्रमुख उपलब्धि रही है। इसके अलावा सीजन में एक समान रूप से उठान, घटोत्तरी में बिना भेदभाव के सभी को एक समान समझने, आढ़तियों की समस्याओं के लिए सीजन में दिन-रात काम करने, बारदाने सहित तमाम जरूरतों को समय पर पूरा करने जैसे कार्यों में वे पिछले एक साल में कभी भी पीछे नहीं हटे। चाहे आढ़तियों के भुगतान के लिए धरना देने की बात रही हो या फिर डीसी से मिलकर उनका हक रखने की बात रही हो। वे आगे रहे। उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद सभी ने सर्वसम्मति से रामनिवास खुरानिया को कार्यकारी अध्यक्ष चुन लिया गया। साथ ही कृष्ण मित्तल ने अपने एक साल का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। इसके बाद कार्यकारी प्रधान रामनिवास खुरानिया ने वीरवार 7 मार्च को मंडी में प्रधान पद के चुनाव की तारीख का एलान कर दिया। मंगलवार बारह बजे तक नामांकन पत्र भरने व 4 बजे तक नाम वापस लिए जाने का समय रहेगा।
उधर, बैठक के बाद दो नाम बतौर उम्मीदवार सामने आए। जिसमें निवर्तमान प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि वे फिर से चुनाव लड़ रहे हैं, ताकि आढ़तियों की सेवा इसी प्रकार से कर सकें।
दूसरी ओर पांच बार प्रधान रह चुके सुरेश चौधरी भी प्रधान पद के लिए मैदान में आए हैं। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ अपने प्रतिष्ठान पर बैठक ली। चौधरी ने कहा कि उन्होंने 40 साल से जारी मंडी में उठान में रिश्वतखोरी को खत्म किया था। जो उनकी पिछले कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि थी। जब-जब वे प्रधान रहे, सभी आढ़तियों को साथ लेकर चले। उनका प्रयास रहेगा कि वे आगे भी सभी आढ़तियों को साथ लेकर चलेंगे और मंडी में किसी भी तरह की समस्या पर अगुवाई में आढ़तियों की मदद करेंगे।
नौ साल का मंदिर में आय-व्यय का ब्योरा भी रखा गया : चुनावी बैठक में 9 साल का मंदिर की आय-व्यय का ब्योरा रखा गया। अब तय कर लिया गया है कि जो भी मंडी का प्रधान बनेगा, मंदिर के प्रबंधन का काम भी उसी के जिम्मे होगा। वही मंदिर सभा का भी प्रधान रहेगा। इस समय यह जिम्मेदारी सुरेश चौधरी के पास थी।
राजनीतिक रूप से अहम है कैथल की अनाज मंडी : कैथल अनाज मंडी को शहर की राजनीति का केंद्र माना जाता है। यहां पर हजारों किसान, मजदूर सहित आढ़तियों व मुनीम से लेकर चौकीदार तक लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि शहर की राजनीतिक दिशा मंडी ही तय करती है। इसलिए इसके चुनाव पर प्रमुख राजनीतिक दलों की भी नजर रहती है। अपने-अपने समर्थक उम्मीदवारों को जितवाने में राजनेता भी कई बार यहां सीधा हस्तक्षेप करते हुए देखे गए हैं।