सीएम के रोड शो के दौरान कैलाश के भाजपा में शामिल होने की लिखी जा चुकी थी पटकथा
- ज्वाइनिंग की औपचारिकता के बाद भाजपा में शामिल हो जाएंगे इनेलो नेता
- चुनाव लड़ने की बात पर कहा- पहले ज्वाइनिंग हो जाए, फिर पार्टी जहां से कहेगी, वहीं से चुनाव लड़ लेंगे
नसीब सैनी
कैथल। करीब साल भर से लगाए जा रहे कयासों पर सोमवार को विराम लग गया, जिसमें कैलाश भगत के भाजपा में जाने की बातें चल रही थीं। सोमवार को चंडीगढ़ में अपने चुनिंदा साथियों के साथ सीएम से मुलाकात करके कैलाश भगत ने भाजपा में जाने पर अपनी सहमति दे दी। कैलाश भगत ने इनेलो की टिकट पर तीन बार चुनाव लड़ा और तीनों बार दूसरे नंबर पर रहे।
कैलाश भगत के पिता अमरनाथ भगत आजीवन भारतीय जनता पार्टी के सदस्य रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल से उनका पुराना नाता रहा है। बतौर प्रचारक मनोहर लाल अमरनाथ भगत से मिलते रहते थे। इसी बीच वर्ष 2005 में पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने अमरनाथ भगत के पुत्र कैलाश भगत को कैथल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चौधरी शमशेर सिंह सुरजेवाला के खिलाफ इनेलो प्रत्याशी बनाया था। उस समय कैलाश भगत ने कड़ी टक्कर दी और 5112 वोटों से हार गए। शमशेर सुरजेवाला को 43 हजार 573 वोट मिले थे, जबकि कैलाश भगत को 38 हजार 461 वोट। इसके बाद सुरजेवाला परिवार कैथल विधानसभा सीट पर काबिज रहा। अगले विधानसभा चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला ने फिर से कैलाश भगत को इनेलो प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में उनके सामने कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला थे। जिसमें सुरजेवाला 21 हजार मतों के भारी अंतर से विजयी रहे और कैलाश भगत को फिर से दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। सुरजेवाला को इस चुनाव में 59 हजार 732 वोट मिले। जबकि कैलाश की वोट पहले चुनाव से भी घट गई और उन्हें 37 हजार 321 वोट मिले। इसके बाद वर्ष 2004 के चुनाव में भी इनेलो प्रत्याशी के तौर पर ओमप्रकाश चौटाला ने कैलाश भगत को ही चुना और उन्हें उम्मीदवार बनाया। इस बार उनकी हार का अंतर और भी बढ़ गया। रणदीप को पिछले चुनाव में मोदी लहर के बावजूद 65 हजार 524 वोट मिले। जबकि कैलाश को 41 हजार 849 वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी राव सुरेंद्र सिंह को भी करीब 38 हजार वोट मिले थे। तीन चुनाव हारने के बाद कैलाश भगत पिछले तीन सालों से राजनीति से दूर रहे। इस दौरान उन्होंने इनेलो सहित सभी दलों से दूरी बनाए रखी। पिछले लंबे समय से उनके भाजपा ज्वाइन करने कयास लगाए जा रहे थे। सीएम के रोड शो के दौरान ही उनके भाजपा ज्वाइनिंग की पटकथा लिखी जा चुकी थी। उस समय उन्होंने सीएम से रोड शो में भी मुलाकात की थी। बाद में आरकेएसडी कॉलेज में भी वे सीएम के साथ दिखे थे। लेकिन इन कयासों पर विराम सोमवार को उस समय लगा, जब वे सीएम से मिलकर बाहर निकले।
राजनीतिक मायने : कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र में भाजपा द्वारा मजबूत उम्मीदवार ढूंढा जा रहा था। कैलाश भगत एक मजबूत उम्मीदवार साबित होंगे। दोनों जिलों में पंजाबी समाज की भी अच्छी-खासी वोट हैं। साथ ही कैलाश की अपनी साफ-सुथरी व धार्मिक छवि से भी उन्हें लाभ मिल सकता है। इसके अलावा भाजपा की कांग्रेस के नेता रणदीप सुरजेवाला को घेरने की भी यह एक रणनीति हो सकती है। कैलाश कैथल में जाना-माना चेहरा हैं और तीन बार चुनाव लड़कर मजबूत स्थिति का प्रदर्शन कर चुके हैं।
कैलाश भगत एक परिचय : कैलाश भगत भाजपा के वरिष्ठ एवं वयोवृद्ध नेता अमरनाथ भगत के पुत्र हैं। वे चावल निर्यातक के तौर पर पहचान रखते थे। वर्ष 2005 में इनेलो में शामिल हुए। इसके बाद लगातार तीन बार चुनाव लड़े। एक बार जिला अध्यक्ष भी रहे।