कैथल। जिले में धड़ल्ले से अवैध कालोनियां विकसित हो रही हैं। हालांकि डीटीपी की टीम लगातार अवैध कालोनियों में तोड़फोड़ का दावा करती है, लेकिन कुछ समय बाद फिर काॅलोनी विकसित हो जाती हैं। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक गांवों और शहर की कृषि भूमि पर 75 अवैध काॅलोनियां विकसित हो रही हैं। जबकि हकीकत में आंकड़ा इससे भी अधिक है। इस वर्ष करीब 30 काॅलोनाइजर पर एफआईआर कराई गई है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है
अधिवक्ता राजेश शर्मा का कहना है कि शासन और प्रशासनिक संज्ञान के बिना अवैध कालोनियां विकसित नहीं हो सकती। कालोनाइजर क्षेत्र में अवैध कालोनियां काट रहे हैं। बिना अनुमति के बनाई गईं इन काॅलोनियों में डीपीसी, चहारदीवारी, मकान आदि टूटने पर प्लाट धारक को क्षति होती है। काॅलोनाइजर प्लाट बेचकर निकल जाते हैं। सुविधाओं की कमी से वहां लोग परेशान हो रहे हैं। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
यहां कटी अवैध कालोनी पर हुई एफआईआर
- नरड़ में अलग अलग जगह कालोनी काटने पर कालोनाइजर के खिलाफ 341 व 342 नंबर एफआईआर।
- तितरम में अलग अलग जगह कालोनी काटने पर काॅलोनाइजर के खिलाफ 418 व 419 नंबर।
- पट्टी गादर में 521 व 522 नंबर एफआईआर।
- चीका में 523 और पबनावा में 524 नंबर एफआईआर।
- सीवन में 573, फतेहपुर में 574 व पट्टी चौधरी में 575 नंबर एफआईआर।
- कलर माजरा में 599, चीका में 711 व 712 नंबर एफआईआर।
- फतेहपुर में 852, 853 व बाता में 949 नंबर एफआईआर।
- पट्टी गादर में 950, सीवन में 987 और कठवाड़ में 1016 नंबर एफआईआर।
अवैध कालोनियों में निरंतर कार्रवाई : डीटीपी
जिला नगर योजनाकार प्रवीन कुमार का कहना है कि विभागीय टीम निरंतर अवैध कालाेनियों में तोड़फोड़ कर रही है। काॅलोनाइजर के खिलाफ एफआईआर कराई जाती है। जिले में अवैध कालोनियां विकसित नहीं होने दी जा रही। लोगों से भी अपील है कि अवैध कालोनियों में प्लाट आदि न खरीदें।