संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला न्यायिक परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें वर्षों से लंबित 7308 मामलों का आपसी सहमति से समाधान किया गया। इन मामलों में 15 साल पुराने एक पैतृक जमीन के विवाद सहित तीन साल पुराने वाहन चालान का भी निपटारा किया गया।
लोक अदालत में सबसे अधिक मामले यातायात चालानों से संबंधित रहे। कुल 12,789 लंबित मामलों को सुनवाई के लिए रखा गया था, जिनमें से 7308 मामलों का निपटारा किया गया। इन मामलों में आपराधिक मामले, एनआई एक्ट, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन दुर्घटना दावा, श्रम विवाद, राजस्व और अन्य मामले शामिल रहे। लोक अदालत में कुल 6 करोड़ 22 लाख 7 हजार 875 रुपये की राशि से जुड़े विवादों का समाधान किया गया।
छह न्यायिक बेंचों का किया गया था गठन : राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन के लिए विभिन्न न्यायिक अधिकारियों की छह बेंचों का गठन किया गया। इनमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंदिता कौशिक,
अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) अपर्णा भारद्वाज, सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) संदीप कौर, तुषार शर्मा, साक्षी मेंगी तथा अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) गुहला डिवीजन राजविंदर सिंह शामिल रहे।
लोक अदालत सौहार्दपूर्ण समाधान का मंच : कंवल कुमार
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कंवल कुमार ने बताया कि लोक अदालत ऐसा मंच है, जहां किसी पक्ष की हार या जीत नहीं होती, बल्कि आपसी सहमति के आधार पर विवादों का समाधान किया जाता है। उन्होंने कहा कि इससे दोनों पक्षों के बीच भाईचारे और सौहार्द की भावना मजबूत होती है। लोक अदालत शीघ्र, सरल और सस्ता न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है।
32 यातायात चालानों का भी हो गया समाधान
राष्ट्रीय लोक अदालत में यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े 32 चालानों का भी निपटारा किया गया, जिससे लाखों रुपये का राजस्व जमा हुआ।
न्यायिक अधिकारियों ने वाहन चालकों को भविष्य में यातायात नियमों का पालन करने, हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने तथा सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी दिया।
15 साल पुराना पैतृक जमीन विवाद सुलझा
लोक अदालत में वर्ष 2011 से लंबित दीवानी मुकदमा “रेणू बाला बनाम राम चंद्र” विशेष चर्चा का विषय रहा। यह मामला सीवन क्षेत्र के एक परिवार की पैतृक जमीन में हिस्सेदारी को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद से जुड़ा था।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अपर्णा भारद्वाज की अध्यक्षता में दोनों पक्षों को समझाकर आपसी सहमति से समाधान के लिए प्रेरित किया गया। लगातार प्रयासों के बाद दोनों पक्ष समझौते पर पहुंच गए। परिवार के सदस्यों ने कहा कि इस पहल से उनका समय, धन और मानसिक तनाव बचा तथा वर्षों पुराना विवाद सौहार्दपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया।
तीन साल पुराना चालान 2200 रुपये में निपटा
कैथल निवासी राजेश ने बताया कि उनकी गाड़ी का चालान तीन वर्ष से लंबित था और पहले तीन बार अदालत में नंबर नहीं लग पाया था। इस बार उन्होंने 10 दिन पहले आवेदन किया था। लोक अदालत में उनका पांच हजार रुपये का चालान 2200 रुपये में निपटा दिया गया।