कैथल। फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। कृषि विभाग ने 50 करोड़ रुपये की राशि शुक्रवार तक किसानों के खाते में जमा कर दी है। इससे 52 हजार किसानों को फायदा मिला है। यह राशि किसानों को आगामी फसल के खर्च निकालने में मदद करेगी। विदित रहे कि 52 हजार किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन कर विभाग के पोर्टल पर जमीन का पंजीकरण करवाया था। विभागीय पोर्टल पर साढ़े चार लाख एकड़ पंजीकरण हुआ था। पंजीकरण के बाद कृषि विभाग की टीमों ने इन सीटू व एक्स सीटू माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों का खेतों में जाकर भौतिक सत्यापन किया। सत्यापन में करीब साढ़े चार लाख एकड़ का पंजीकरण सही पाया गया था।
पिछले वर्षों में किसान फसल अवशेष जला देते थे। इससे न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता था, बल्कि जमीन की उर्वरता भी कमजोर होती थी। सरकार ने इस समस्या को कम करने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन पर प्रोत्साहन राशि देने की योजना शुरू की थी। पहली बार 1200 रुपये प्रति एकड़ यह राशि किसानों को मिली है। इससे पहले के सीजन में राशि 1000 हजार रुपये थी।
11 स्थानों पर मिली आग लगने की जानकारी
विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस बार सिर्फ 11 स्थानों पर आगजनी हुई, जबकि पिछले वर्ष 270 किसानों ने अवशेष जलाए थे। हरसेक एप के माध्यम से इस सीजन में 72 लोकेशन की सूचना विभाग को मिली, जिनमें केवल 11 सत्यापित हुए। इससे जुर्माने के रूप में 11 लाख रुपये की राशि भी वसूली गई। फसल अवशेष प्रबंधन की वजह से इस बार वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के आसपास रहा, जबकि पिछले साल यह 450 के आसपास था।
10 लाख मीट्रिक टन का हुआ प्रबंधन
कैथल जिले में करीब साढ़े चार लाख एकड़ भूमि पर धान की खेती हुई। इस फसल से लगभग 10 लाख मीट्रिक टन अवशेष का प्रबंधन किया गया। 75 प्रतिशत पीआर किस्म और 25 प्रतिशत बासमती किस्म के अवशेष शामिल थे। 800 बेलर मशीन और 500 सुपर सीडर मशीनों की मदद से अवशेष प्रबंधन किया गया। इस तरह कृषि विभाग ने किसानों की मदद से प्रदूषण को कम करने और भूमि की उर्वरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण कदम उठाया
छह हजार रुपये आए खाते में: प्रदीप कुमार
किठाना के किसान प्रदीप कुमार ने बताया कि पांच एकड़ फसल अवशेष का प्रबंधन किया था। छह हजार रुपये उसके खाते में आ गए है। दो साल से उसने कभी धान के बचे हुए अवशेषों में आग नहीं लगाई है। गेहूं की फसल भी अच्छी खड़ी है। धान में भी अच्छी पैदावार निकली थी।
10 एकड़ का किया था प्रबंधन : नरेश कुमार
जाखौली के किसान नरेश कुमार ने बताया कि उसने 18 एकड़ में धान की फसल लगाई हुई थी। 21 हजार 600 रुपये उसके खाते में आए है। काफी समय से वह बेलर के माध्यम से गांठे बनवा रहा है। इससे प्रदूषण भी कम हो रहा है।
50 करोड़ रुपये किसानों के खाते में डाले: जगदीश मलिक
फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों के खाते में 50 करोड़ रुपये डाल दिए गए हैं। जिले के करीब 52 हजार किसानों को यह राशि मिली है, इससे पहले 995 किसानों के खाते में फसल अवशेष प्रबंधन करने वाली मशीनों की अनुदान राशि डाली गई थी। आगजनी रोकने के लिए प्रशासन की हर गांव में टीमें गठित थी। समय- समय पर किसानों को जागरूक शिविर लगाकर फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जानकारी दी जा रही है।
- जगदीश मलिक, सहायक कृषि अभियंता कैथल