महाभारत की 48 कोस की परिधि में शुमार 65 तीर्थों की भी ले लो सुध सरकार
नसीब सैनी
कैथल। महाभारत का युद्ध जिस 48 कोस की धरती में लड़ा गया था। वह धरती आज भी अपनी वास्तविक पहचान से महरूम है। कुरुक्षेत्र जहां 48 कोस की परिधि का एक कोना भर है, वहां सरकार लगभग 20 करोड़ की राशि से भव्य कार्यक्रम आयोजित कर रही है। वहीं इस परिधि में शामिल कैथल जिले की 90 प्रतिशत भूमि पुकार रही है कि इधर भी ध्यान दो सरकार। स्वयं केडीबी ने स्वीकार किया है कि कुरु भूमि के 65 तीर्थ कैथल जिले में स्थित हैं। इसके बावजूद यहां गीता जयंती उत्सव तो क्या किसी भी अवसर पर सरकार की ओर से कार्यक्रम नहीं होता।
कैथल जिले में पंजाब सीमा पर स्थित गांव बैहर-साहब में 48 कोस की भूमि के रक्षकों में से एक अरंतुक यक्ष का तीर्थ। इसके अलावा कैथल शहर, कलायत, सीवन, पूंडरी क्षेत्र के गांवों में महाभारत युद्ध के प्रमाण आज भी गवाही दे रहे हैं कि युद्ध इसी क्षेत्र में हुआ था। गांव सेरहधा को महाभारत युद्ध की मध्य भूमि माना जाता है। जहां सेना के बीच में पहुंच कर भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का संदेश दिया था।
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा पूर्व में 51 और अब किए गए सर्वे में अकेले कैथल जिले में 65 तीर्थों की पहचान की है। जो कुरु भूमि में महाभारत से संबंधित हैं। इनमें पहले सर्वे के 51 तीर्थ निम्नलिखित हैं।:
1. श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर कैथल-
2. वृद्धकेदार सरोवर कैथल
3. कुलोत्तरण तीर्थ कुल्तारण
4. कोटी कोटेश्वर तीर्थ क्योड़क
5. वेदवती तीर्थ बलवंती
6. नैमिष तीर्थ नौच
7. श्रीकुंज तीर्थ भानपुर-नौच के निकट
8. वरुण तीर्थ रसूलपुर
9. सप्त तीर्थ मांडी
10. इक्षुमति तीर्थ पोलड़
11. स्वर्गद्वार तीर्थ सीवन
12. सुतीर्थ सौथ
13. ब्रह्मवत तीर्थ गौहरां खेड़ी
14. यक्ष तीर्थ बहर-साहब
15. ऋंगी तीर्थ सांघन
16. गोभवन गुहणा
17. मानुष मानस
18. आपगा गदली
19. सरक शेरगढ़
20. देवी देवगढ़
21. अंबा ढयोडखेड़ी
22. कपिलमुनि कलायत
23. खटवांगेश्वर खडालवा
24. मुक्टेश्वर मटौर
25. श्री कसान
26. रसमंगल बालू, सौंगल व जाखौली के बीच
27. चक्र सेरहधा
28. कुकृत्यनाशन काकौत
29. काव्य करोड़ा
30. हव्य भाणा
31. पूंडरीक पूंडरी
32. सूर्य हाबड़ी
33. विष्णुवर बरसाना
34. कुजोमी हजवाना
35. मधुवटी मोहना
36. श्रीवृष्टक टयोंठा
37. ऋणमोचन रसीना
38. अलेपम साकरा
39. कु कुंड धेरड़ू
40. आज्ञाचक्र आंहू
41. पवनहृदय तीर्थ पबनावा
42. फल्गू फरल
43. पानिखात फरल
44. यज्ञसन ग्योंग
45. ब्रहमोद्वार सिल्लाखेड़ा
46. गढऱथेश्वर कौल
47. लवकुश मूंदड़ी
48. कपिलमुनि कौल
जैसा की इतिहासकार बीबी भारद्वाज ने नाम बताए।
कैथल के इतिहास और महाभारतकालीन तीर्थों पर किताब लिख रहे इतिहासकार प्रो. बीबी भारद्वाज का कहना है कि केडीबी तो कुरुक्षेत्र विशेष रूप से ब्रह्मसरोवर से बाहर ही नहीं निकलना चाहता। कैथल के क्षेत्रफल का 90 प्रतिशत इलाका कुरु की 48 कोस की परिधि में आता है। जहां पूर्व में केडीबी द्वारा यह स्वीकार किया गया कि यहां 51 तीर्थ हैं। जबकि इससे भी अधिक तीर्थ इस भूमि में हैं। जिन पर कम से कम गीता जयंती उत्सव पर तो कार्यक्रम होने चाहिए। दो साल से बेशक सभी जिलों में गीता जयंती मनाई जाती हो, लेकिन कैथल में विशेष आयोजनों का हक बनता है।
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य श्याम सुंदर बंसल का कहना है कि इस बारे में मांग उठाई गई है। एक बार फिर अधिकारियों के सामने यह बात रखी जाएगी।
कैथल में 51 नहीं बल्कि 65 तीर्थों की पहचान की गई है। जो कुरु की 48 कोस की भूमि में आते हैं। यह बात सही है कि कैथल जिले का अधिकतर हिस्सा भी इस भूमि में आता है। न केवल कैथल बल्कि करनाल, जींद व पानीपत जिलों में भी महाभारत से जुड़े तीर्थों पर कार्यक्रम करवाए जाएंगे। इस तरह की प्लानिंग की जा रही है। इस बार यह फाइनल नहीं हो पाया। मटौर सहित कई तीर्थों का जीर्णोंद्धार किया जा रहा है।
अशोक सुखीजा, वाइस चेयरमैन, केडीबी, कुरुक्षेत्र।
48 कोस की परिधि के एक कौने में स्थित कुरुक्षेत्र में हो रहा है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 20 करोड़ की लागत से भव्य कार्यक्रम
स्वयं केडीबी द्वारा चिन्हित कैथल जिले में स्थित कुरु की भूमि के 65 तीर्थ उपेक्षा का शिकार
हर साल उठती है मांग, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड कुरुक्षेत्र से बाहर निकलने को तैयार नहीं
कैथल जिले का 90 प्रतिशत इलाका कुरु की भूमि में
इतिहासकारों व जिले के लोगों की मांग, कैथल में भी कार्यक्रम हों तो असली महाभारत युद्ध स्थली को मिलेगी वास्तविक पहचान
फोटो संख्या-4 व 5