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डेरा बाबा लदाना पर कब्जे को लेकर महंत दूजपुरी की बनाई प्रशासन ने चक्करघिन्नी

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कब्जे के एवज में रिश्वत मांग रहे अधिकारियों का करेंगे खुलासा, बोलकर अज्ञात स्थान की ओर निकले महंत दूजपुरी
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- डेरा बाबा राजपुरी में गद्दी पर कब्जे का मामला, आत्मदाह की चेतावनी देने के बाद एसपी ने महंत को बुलाकर कहा कि दो-तीन दिन में दिलवाया जा सकेगा कब्जा
- विरोध स्वरूप लघु सचिवालय में ही धरने पर बैठे दूजपुरी को डीएसपी तरुण सैनी आश्वासन देकर ले गए तहसीलदार से मनवाने के लिए, तहसीलदार के पास पहुंचे फिर डीएसपी तरुण सैनी ने बुलाया

फोटो नंबर-03 व 04
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। गांव बाबा लदाना में स्थित डेरा बाबा राजपुरी में पिछले दस महीने से चल रहे गद्दी विवाद में महंत दूजपुरी के पक्ष में फैसला आने के बावजूद उन्हें कब्जा नहीं मिल पा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटते हुए महंत व उनके समर्थक परेशान हैं। सोमवार को महंत दूजपुरी द्वारा आत्मदाह की धमकी देने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों में चक्कर कटवाए गए। अंतत: जब महंत की सुनवाई नहीं हुई तो वे मंगलवार को इस मामले में अब तक उनसे रिश्वत वसूलने वाले अधिकारियों व रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों के नाम सार्वजनिक करने की चेतावनी देकर अज्ञात स्थान की ओर चले गए। जब तक महंत लघु सचिवालय में रहे, तब तक एसएचओ सिविल लाइन सहित पुलिस का खुफिया तंत्र महंत के साथ-साथ रहा। कहीं वे लघु सचिवालय मेें आत्मदाह न कर लें।
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महंत ने लगाया आरोप, दो बार फैसले के बाद प्रशासन नहीं दिलवा रहा कब्जा : सोमवार को बाबा राजपुरी के डेरे की गद्दी पर कब्जे दिलवाने की मांग को लेकर बाबा दूजपुरी सुबह 11 बजे ग्रामीणों के साथ डीसी से मिलने के लिए लघु सचिवालय में पहुंचे। लेकिन यहां पर डीसी के न मिलने पर बाबा दूजपुरी ने एसपी से मिलकर कब्जा देने की गुहार लगाई। लेकिन एसपी ने उन्हें कहा कि दो से तीन दिन में ही उन्हें कब्जा दिलवाया जा सकेगा। इसके बाद महंत ने कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी नहीं सुनी तो वे लघु सचिवालय में आत्मदाह कर लेंगे। उन्होंने बताया कि गांव बाबा लदाना में डेरे के नाम 66 एकड़ खेती की जमीन है। गांव लैंडरपीरजादा में 50 एकड़ जमीन की डिग्री है और 650 एकड़ भूमि पर केस चल रहा है। गांव के 10 लोग उनका विरोध कर रहे हैं, जबकि पूरा गांव उनके समर्थन में है। कोर्ट के दो बार के फैसले के बावजूद प्रशासन उन्हें कब्जा नहीं दिलवा रहा है।
पिछले 10 महीनों से चल रहा है विवाद : डेरा बाबा राजपुरी की गद्दी को लेकर चल रहा विवाद 10 माह पुराना हो चुका है। बता दें कि महंत पर कुछ गांव वालों ने महिला पर मारपीट करने का आरोप लगा था। जिस पर गांव वालों ने दूसरे महंत प्रेमपुरी को गद्दी पर बैठा दिया। लेकिन गांव में गद्दी को लेकर दो महंतों के दो गुट बन जाने पर जिला प्रशासन ने टकराव होने की स्थिति में डेरे को अपने कब्जे में ले लिया। इससे पहले महंत दूजपुरी ने कोर्ट केस कर दिया। जिस पर कोर्ट ने महंत दूजपुरी के पक्ष में फैसला दिया। अब दूजपुरी मंहत कोर्ट के आदेशों पर जिला प्रशासन से कब्जा दिलवाने की मांग कर रहा है।
ऐसे काटते रहे महंत कार्यालय दर कार्यालय चक्कर:-
11 बजे महंत दूजपूरी लघु सचिवालय में पहुंचे।
11.30 बजे से उनके कार्यालय में मिले। एसपी ने तीन-चार दिन का समय दिया।
12.00 बजे महंत लघु सचिवालय में स्थित ई दिशा केंद्र के सामने अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए और आत्मदाह की धमकी दी।
12.50 मिनट पर डीएसपी तरुण सैनी उन्हें मनाने के लिए नीचे आए।
1.00 बजे तरुण सैनी उन्हें मनाकर नायब तहसीलदार ईश्वर सिंह के पास लेकर पहुंचे। तहसीलदार ने महंत ने कहा कि डीएसपी साहब सुनवाई करेंगे। इसके बाद फिर से डीएसपी तरुण सैनी के कार्यालय में गए। डीएसपी तरुण सैनी महंत को एक बार फिर से एसपी कार्यालय में ले गए। जहां से बाहर आकर महंत ने कहा कि अधिकारी उन्हें अंदर (जेल में) करने की धमकी दे रहे हैं।
अंत में महंत 1.45 बजे महंत अपने समर्थकों को यह कहकर अज्ञात स्थान पर चले गए कि यदि प्रशासन ने मंगलवार तक उनकी सुनवाई नहीं तो वे मंगलवार को उन अधिकारियों के नाम सार्वजनिक कर देंगे, जिन्होंने इस मामले में उनसे रिश्वत वसूली है और रिश्वत की मांग की है।
आत्मदाह की धमकी के बाद अलर्ट रही पुलिस : महंत दूजपूरी द्वारा आत्मदाह की धमकी दिए जाने के बाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट हो रहा। जब तक महंत लघु सचिवालय में रहे, तब तक एसएचओ सिविल लाइन सहित खुफिया तंत्र के कर्मचारी महंत के साथ-साथ रहे।
उधर, एसपी वसीम अकरम ने कहा कि ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त होने पर ही पुलिस सुरक्षा मुहैया करवाई जाएगी। यदि महंत आत्महत्या की बात कह रहे हैं कि तो उन्हें रोकने के लिए गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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नायब तहसीलदार ईश्वर सिंह ने कहा कि ड्यूटी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति डीसी द्वारा की जानी है। डीसी सोमवार को कार्यालय में नहीं पहुंचे थे। जब डीसी के आदेश होंगे, तभी कब्जा छोड़ दिया जाएगा।
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