सोनू थुआ कैथल। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. नंदिता कौशिक ने वीरवार को भ्रष्टाचार के करीब दो साल पुराने चर्चित मामले में जिला परिषद सदस्य विक्रमजीत और पार्षद प्रतिनिधि भरत ढुल को सात-सात साल की कैद की सजा सुनाई। 18 जनवरी 2024 को एक लाख रुपये की रिश्वत लेने का यह मामला उस समय जिलेभर में सुर्खियों में रहा था।
मामले के अगले ही दिन 19 जनवरी 2024 को जिला परिषद के वर्तमान अध्यक्ष और तत्कालीन उपाध्यक्ष कर्मबीर कौल, 17 पार्षदों के साथ लघु सचिवालय पहुंचे थे और जोरदार हंगामा किया था। पार्षदों ने मामले को राजनीतिक षड्यंत्र करार देते हुए पहले उपायुक्त और बाद में पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की थी। पार्षदों का आरोप था कि जिला परिषद सदस्य विक्रमजीत और प्रतिनिधि भरत हरसौला को साजिश रचकर झूठे मामले में फंसाया गया है।
पार्षदों की ओर से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा गया था, जिसमें दोनों को निर्दोष बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। हालांकि अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा रिश्वत लेना जनता के विश्वास के साथ सीधा धोखा है और ऐसे मामलों में सख्त सजा आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि एक लाख रुपये की रिश्वत के मामले में निलंबित जिला परिषद सदस्य विक्रमजीत को बहाल करने के आदेश पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी रोक लगा दी थी।
मुख्यमंत्री को दी शिकायत में चेयरमैन और ठेकेदार पर लगाए गए थे ये आरोप
(पार्षदों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन के प्रमुख बिंदु) जिला परिषद में किसी भी कार्य के भुगतान के लिए पार्षदों के हस्ताक्षर नहीं होते। भुगतान केवल चेयरमैन या सीईओ द्वारा किया जाता है, ऐसे में पार्षद रिश्वत किस आधार पर ले सकते हैं। टेंडर भी ऑनलाइन प्रक्रिया से हुआ है। ठेकेदार विजेंद्र चहल ने एक जिला परिषद क्लर्क को फोन कर बताया था कि वह भारत हरसौला को टैंकरों के टायर बदलवाने के नाम पर पैसे देगा। आधे घंटे के भीतर दोनों को साजिश के तहत फंसा दिया गया। ठेकेदार विजेंद्र चहल और तत्कालीन चेयरमैन दीपक मलिक के बीच घनिष्ठ संबंध हैं, रिश्तेदारी होने की भी आशंका जताई गई। दोनों के बीच 17 और 18 जनवरी को हुई कॉल रिकॉर्डिंग की जांच की मांग की गई।
वाटर टैंकरों में पुराने टायर, रिम और चादर का इस्तेमाल किया गया। टैंकरों के बिल वास्तविक कीमत से चार गुना अधिक बनाए गए और भुगतान भी हो चुका है। वाटर कूलर से संबंधित कार्य बार-बार एक ही ठेकेदार को दिया गया। कई जगह काम अधूरा है। आरोप है कि ठेकेदार पार्षदों को कैश भुगतान का लालच देता रहा। वार्डों में लगाई गई ओपन जिम तत्कालीन चेयरमैन और उनके रिश्तेदारों की कंपनी से खरीदी गई। सामान्य दर से चार गुना अधिक बिल बनाकर भुगतान कराया गया। संवाद
यह रहा पूरा मामला
ग्रीन नेटवर्क फर्म के संचालक विजेंद्र चहल ने जिला परिषद को वाटर टैंक और वाटर कूलर की आपूर्ति की थी। वार्ड नंबर 11 के जिला परिषद सदस्य विक्रमजीत और वार्ड नंबर 3 की महिला पार्षद के पति भरत ढुल ने लगभग 30 लाख रुपये के बिल पास कराने के एवज में 10 प्रतिशत कमीशन की मांग की। बाद में मामला एक लाख रुपये में तय हुआ। तीन किश्तों में रिश्वत देने की सहमति बनी। पहली किश्त के रूप में एक लाख रुपये कैथल-करनाल रोड पर नेशनल हाईवे-152 के फ्लाईओवर के नीचे देने का स्थान तय किया गया। जैसे ही ठेकेदार ने दोनों को पैसे दिए, इशारा मिलते ही एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों को कार सहित पकड़ लिया। दोनों के पास से 50-50 हजार रुपये बरामद किए गए। शिकायतकर्ता ने रिश्वत की मांग की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी की थी। एसीबी अंबाला ने पीसी एक्ट की धारा 7, 7-ए, 13(1)(बी), 13(2) और आईपीसी की धारा 384 व 120-बी के तहत 18 जनवरी 2024 को मुकदमा नंबर तीन दर्ज किया था। इसके बाद से मामला अदालत में विचाराधीन था, जिसमें अब दोष सिद्ध होने पर सजा सुनाई गई है।