कैथल। रविवार शाम को चिल्ड्रन पार्क में अचानक दौरा करने पहुंचे हरियाणा सरकार के एक और सुधार प्रोजेक्ट डायरेक्टर रोकी मित्तल को पार्क में कई अव्यवस्थाएं मिलीं। पार्क में दौरा करने पहुंचे मित्तल को विद्क्यार झील में गंदगी मिली, फव्वारे भी खराब मिले और झूले भी टूटे हुए मिले। इसके साथ ही पार्क में बनाए गए शौचालयों की हालत खस्ता थी और पीने का पानी भी पार्क में नहीं मिला। पार्क में तैनात 32 कर्मचारियों में से केवल दो ही कर्मचारी मिले। जिस पर डायरेक्टर ने ठेकेदार को फोन करके लताड़ लगाई।
टैंकियों में पानी भी मिला गंदा
पार्क में निरीक्षण करने पहुंचे हरियाणा सरकार के एक और सुधार कमेटी के डायरेक्टर रोकी मित्तल सबसे पहले विद्क्यार झील की स्थिति की जांच की। जिसमें उन्हें यहां पर गंदगी का आलम मिला। इसके बाद वह यहां स्थित पानी की टंकी के पास पहुंचे जहां उन्होंने टंकी में पानी की जांच की। यहां पर भी उन्हें गंदा पानी मिला। इसके बाद वे शौचालयों में पहुंचे जहां उन्हें शौचालयों की हालत खस्ता मिली। यहां पर रोकी मित्तल ने यहां पर ड्यूटी दे रहे कर्मचारियों की जानकारी हासिल की तो उन्हें केवल दो ही कर्मचारी मिले। जिसमें एक सुपरवाईजर और केवल एक ही सुरक्षाकर्मी था। जब इन दोनों कर्मचारियों से अन्य कर्मचारियों की संख्या जानी गई तो उन्होंने कुल 32 कर्मचारियों की यहां ड्यूटी बताई। इस पर रोकी मित्तल ने ठेेकेदार से फोन पर कर्मचारियों के बारे जानकारी प्राप्त की तो ठेकेदार के पास कर्मचारियों के न होने का कोई जवाब नहीं मिला और उसने रविवार होने के कारण छुट्टी का बहाना बनाया। इस पर कर्मचारियों से हाजिरी का रजिस्ट्रर मांग तो उन्होंने रजिस्टर के ठेकेदार के पास होने का जवाब दिया।
अधिकतर झूले टूटे मिले
इसके बाद डायरेक्टर ने पार्क में लगाए गए झूलों को भी जांचा। यहां पर लगे अधिकतर झूले टूटे हुए मिले। जिस पर इन झूलों पर बच्चों द्वारा झूलने पर उनके गिरने का अधिक खतरा रहता है।
शहरवासियों ने बताई समस्याएं
पार्क में पहुंचे कई शहरवासियों ने डायरेक्टर को पार्क में सुबह व शाम के समय शरारती तत्वों द्वारा नुकसान करने की भी जानकारी दी गई। आर्य प्रयास संगठन के पदाधिकारी सतीश ने बताया कि यहां पर नप के अधिकारियों की ओर से पार्क में सुरक्षा के लिहाज से कोई उचित प्रबंध नहीं किए गए है। इसके साथ ही यहां पर पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जिसके चलते यहां पर मौजिज लोगों द्वारा कुछ रुपये एकत्रित करके हर रोज 40 से 50 पानी के कैंपर रखवाए जाते हैं। सुरक्षा न होने के कारण कई बार शरारती तत्व पार्क में स्थापित वस्तुओं को नुकसान पहुंचाते हैं और यहां आने वाले लोगों को भी तंग करते है। इस पर डायरेक्टर ने नप के अधिकारियों से इसका जवाब मांग कर इस पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पार्क में व्यर्थ बह रहा पानी
रोकी मित्तल ने जवाहर पार्क में बूस्टर के समीप बनाए गए पानी के टैंकों की भी जांच की। यहां पर एक पाइप लाइन से पानी लीकेज होकर पार्क में बह रहा था। जिस पर मित्तल ने पानी की लीकेज बंद करने के लिए जन स्वास्थ्य कर्मचारी को आदेश दिए।
ठेकेदार के पास कोई जवाब नहीं था
पार्क का निरीक्षण करने के बाद एक और सुधार कमेटी के डायरेक्टर रॉकी मित्तल ने बताया निरीक्षण के दौरान उन्हें पार्क में काफी अव्यवस्थाएं मिली। जिसमें शौचालयों की हालत खस्ता से लेकर यहां पीने के पानी तक की सुविधा नहीं लोगों को मिल रही। इसके साथ ही यहां पर लाइटें भी खराब मिली और विद्क्यार झील में गंदगी पाई गई। यहां पर 32 कर्मचारियों की ड्यूटी होने के बाद केवल दो ही कर्मचारी मिले। जबकि इसका ठेकेदार के पास कोई जवाब नहीं था। अब अव्यवस्थाओं को लेकर पार्क में खर्च हुई राशि की ईओ से जानकारी ली जाएगी। जिसके बाद अधिकारियों व कर्मचारियों की कमी पर स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन को इसकी जानकारी दी जाएगी। जिस भी ठेकेदार और अधिकारी की कमी पाई जाएगी। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ठेकेदार को बुलाया कार्यालय
वहीं अनियमिताओं पर ईओ अशोक हुरिया ने बताया कि डायरेक्टर के पार्क में दौरा करने की जानकारी उन्हें मिली है। जिस पर पार्क की देखरेख करने वाली एजेंसी के ठेकेदार को सोमवार को कार्यालय में बुलाया गया है। जो भी कमी मिली है। उस पर पूरी जानकारी लेकर उसे कमियां दूर करने के निर्देश दिए जाएंगे।