कैथल। जिले में फानों में आग लगाने वाले 503 ऐसे किसानों के खिलाफ कार्रवाई होगी, जिन्होंने अपने खेतों में जानबूझकर फानों में आग लगाई है। ये आदेश डीसी डॉ. प्रियंका सोनी ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों, राजस्व विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जो भी किसान अवशेषों (फानों) में आग लगाता है तो संबंधित किसान के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाते हुए चालान किया जाए।
लघु सचिवालय स्थित सभागार में कृषि एवं किसान कल्याण, राजस्व तथा प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों की बैठक में उन्होंने कहा कि जिला में कहीं भी फानों में आग लगने की घटना की सूचना मिलती है तो तुरंत मौके पर जाकर आवश्यक कार्रवाई की जाए। राजस्व विभाग द्वारा रिपोर्ट बनाकर एसडीएम को दी जाए और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा संबंधित दोषी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए। डीसी ने कहा कि फानों में आग लगाना भारतीय धारा 188 व प्रदूषण नियंत्रण एक्ट 1981 के अनुसार कृषि अवशेष जलाना एक दंडनीय अपराध है। यदि कोई किसान गेहूं के अवशेष जलाता पाया जाता है तो उसे दो एकड़ तक गेहूं के अवशेष जलाने पर 2500 रुपये तथा 2 से 5 एकड़ तक गेहूं के फाने जलाने पर 5 हजार रुपये और 5 एकड़ से अधिक गेहूं के फाने जलाने पर 15 हजार रुपये आर्थिक जुर्माने का प्रावधान है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के डीडीए डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि जिला में 503 किसान फाने जलाने के मामले में चिह्नित किए गए हैं, जिनमें पूंडरी खंड के 175, कलायत खंड के 95, कैथल खंड के 65, राजौंद खंड के 56, गुहला खंड के 61 तथा सीवन खंड के 51 किसान शामिल हैं। एसडीएम ईशा कंबोज, उपमंडलाधीश गुहला महेंद्र पाल, जिला राजस्व अधिकारी सुरेश कुमार, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजबीर खुंडिया, तहसीलदार छोटू राम, गुहला तहसीलदार जगदीश चंद्र, दिनेश शर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।