अनदेखी से बर्बादी की कगार पर पहुंचा सजूमा का सूर्य कुंड
फोटो नंबर-35 व 36
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। गांव सजूमा में डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बने सूर्य कुंड की संभाल न होने के कारण आठ वर्ष में ही बर्बादी की कगार पर पहुंचने लगा है। सरोवर के दोनों और गंदे जल से भरे तालाबों का पानी रिसाव होकर सरोवर के घाटों, बेडों व परिक्रमा मार्ग को पूरी तरह से नुकसान पहुंचा रहा है।
इस पावन सरोवर का जीर्णोद्धार का कार्य जनवरी 2011 में पूरा हुआ था। मात्र आठ साल में ही तीन में से दो घाट व पत्थरों से बने तीन बेड टूट कर गिरने की कगार पर पहुंच चुके हैं। सरोवर की संभाल के लिए शुकदेव मुनि तीर्थ कमेटी का गठन भी किया हुआ है। कमेटी का कहना था कि बनने के बाद न तो कभी कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने सूर्य कुंड की संभाल ली और न ही मेंटेनेंस के लिए धन की व्यवस्था की। सरोवर के परिक्रमा मार्ग पर लगाए गए साउंड व लाइट सिस्टम बर्बाद हो चुके हैं और पत्थर टूट-टूट कर गिर रहे हैं। कमेटी के प्रधान संता राम, कृष्ण कुमार, सुभाष, रमेश, जयपाल, ओमप्रकाश, कुलदीप, रत्न सिंह, रामकरण आदि ने बताया कि सरोवर के दोनों और पूरे गांव के गंदे पानी को अपने में समेटे करीब 15 एकड़ में फैले दो बड़े तालाब हैं जिनका गंदा पानी सरोवर की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है।