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नवरात्र के छठे दिन हुई मां कात्यायनी की अराधना, पूजा कर की सुख, समृद्धि की कामना

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मां कात्यायनी की आराधना में झुके सिर
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फोटो नंबर-41 व 42
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल/कलायत। नवरात्र के छठे दिन श्रद्धालुओं ने मां कात्यायनी की आराधना कर सुख समृद्धि एवं शांति की कामना है। शहर में छोटी देवी, बड़ी देवी व श्री अंबकेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। बड़ी देवी मंदिर में पूजा के लिए पहुंचे श्रद्धालु नरेश मित्तल, पंडित सुशील शर्मा, राहुल, संजू, भीम, अमित, सोनू, राजेश, महीपाल, शम्मी, नितेश ने बताया कि मां भगवती की जो भी सच्चे मन से पूजा करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।
वहीं कलायत में सुबह 4 बजे से मां कात्यायनी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जमा होना शुरू हो गई जो दिन निकलने के साथ बढ़ती ही गई। छठे नवरात्र पर मंदिर परिसर व अन्य कई स्थानों पर भंडारे व हवन का आयोजन भी किया गया। मंदिर के मुख्य पुजारी वेद प्रकाश गौतम ने बताया कि कलायत का नामकरण भी मां कात्यायनी के नाम पर ही हुआ है। अश्विन शुक्ल पक्ष षष्ठी को दुर्गा के छठे स्वरूप के रूप में कात्यायनी की पूजा व उपासना की जाती है।
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ब्रज की अधिष्ठात्री देवी हैं मां कात्यायनी : पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने माता की पूजा की थी। मां ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। मां कात्यायनी की पूजा से वैवाहिक जीवन की शुरुआत अच्छी होती है। मान्यता है कि जिस कन्या की शादी में बाधा आ रही हो उन्हें मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए। मां कात्यायनी की पूजा करते समय लाल वस्त्र धारण करें। माता को लाल रंग के पुष्प अर्पित करें। हल्दी और शहद अर्पित करें। मां कात्यायनी की पूजा सूर्यास्त के समय की जाती है। उन्होंने बताया कि श्री दुर्गा शप्तशति के देवी सूक्तम के इस मंत्र के जाप से मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
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