20 एमएम बारिश से धान की फसल में नुकसान, देर रात से जारी है बारिश
धान की अगेती किस्मों में भारी नुकसान, जमीन पर बिछ गई कई जगह धान
मंडी में पहुंचे धान में भी नुकसान की आशंका
किसानों के हाथ में आकर फिसल गई 5 से 10 प्रतिशत तक नुकसान, जिले में हुई करीब 18 एमएम बारिश
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शुक्रवार की रात से जारी बारिश से धरतीपुत्र को निराश कर दिया है। शनिवार को दोपहर तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। वहीं देर शाम तक बादल छाए रहे। धान की पीआर व 1509 किस्म व पीआर ग्रुप में नुकसान की संभावनाएं हैं। मंडी में भी धान की खरीद का काम प्रभावित हुआ है। इस दौरान 20 एमएम बारिश दर्ज की गई।
शुक्रवार की रात मौसम में आए बदलाव के बाद बारिश शुरू हुई। जो शनिवार को बूंदाबांदी तो कभी तेज बारिश के रूप में दिन भर जारी रही। पूरा दिन आसमान में बादल छाए रहे और एक बार भी सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। जैसे-जैसे आसमान से बूंदे बरस रही थीं, किसानों में मौसम का भय गहराता जा रहा था। इस समय बारिश के कारण 1509 धान की पकी हुई फसल में नुकसान की संभावनाएं हैं। वहीं पीआर ग्रुप में भी नुकसान संभव है। कृषि वैज्ञानिक डा. राजेंद्र श्योकंद का कहना है कि जो फसल जमीन पर बिछ जाएगी, उसमें 5 से 10 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। यदि बारिश एक ही दिन में रुक जाती है तो ज्यादा नुकसान नहीं होगा। लेकिन यह ज्यादा दिन हुई तो पकी-पकाई फसल में भारी नुकसान होगा।
नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि मंडी में करीब 70 हजार से अधिक बोरी की आवक शुक्रवार तक हो चुकी थी। बारिश के कारण शनिवार को आवक नहीं हुई। बारिश के कारण अगले एक-दो दिन तक धान की आवक प्रभावित होगी, साथ ही खरीद पर भी असर पड़ेगा। अभी नुकसान जैसी कोई बात नहीं हैं।
भीगता रहा पीला सोना, बेबस नजर आए किसान
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ढांड। कुदरत के कहर के आगे किसान बेबस नजर आया और कुछ ना कर सका। अपनी 6 महीने की खून पसीने की कमाई को जब कटाई करने के बाद मंडी में लाया तो नमी का बहाना बनाकर खरीदारों ने उसे खरीदने से मना कर दिया। रात के समय अचानक हुई बारिश से उसका पीला सोना खुले आसमान के नीचे पानी-पानी होकर मिट्टी में मिल गया। किसान बलकार सिंह, महेंद्रपाल, सुखविंद्र, धर्मपाल, राजू, हरभजन सिंह ने बताया कि सरकार की गलत नीतियों के चलते आज उनकी धान की बेकद्री हो रही है। मंडियों में धान की फसल आने के बाद उसकी खरीद की जिम्मेदारी सरकार की बनती है। लेकिन आज भी सरकार वर्षों पुरानी एक अक्तूबर से खरीद की परंपरा पर चला रही है।
धान की फसल का भारी नुकसान
सीवन। सीवोन में शनिवार सुबह तेज हवा के साथ हुई बरसात से धान की सभी किस्मों को भारी नुकसान हुआ है। धान की सैकड़ों एकड़ फसल जमीन पर बुरी तरह से लेट गई है जिससे कटाई में बाधा आएगी। साथ ही धान की पैदावार पर इसका काफी प्रभाव पड़ेगा। इस बार बरसात के साथ हवाएं इतनी तेज थी की धान की कोई भी किस्म इसकी चपेट में आने से बच नही पाई। इस समय धान की 1509 किस्म की कटाई का कार्य जोरों से चल रहा था। किसान जगीर सिंह, हजूर सिंह, जसविन्द्र सिंह, अशोक, नसीब सिंह ने बताया कि उन्होंने इस बार धान की 1509 किस्म को यह समझ कर लगाया था की इस बार अच्छे दाम मिलेंगे लेकिन बारिश व तेज हवा ने उनकी आशाओं पर पानी फेर दिया है।
विशेषज्ञ डा. सुशील कुमार का कहना है कि धान की जो फसल अब नीचे गिर गई है उसमें काफी नुकसान हो सकता है। नीचे जो फसल दबी हुई है उसमें धान नहीं पड़ेगा या फिर खराब हो जाएगा। बारिश के साथ हवाएं काफी तेज थी और धान की फसल लगभग पकने को तैयार है।